कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Digvijaya Singh इन दिनों छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। बुधवार को रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राज्यसभा जाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कहा कि अब वे उच्च सदन की राजनीति में नहीं जाएंगे और नए नेताओं को अवसर देना चाहते हैं।
राज्यसभा जाने से किया इनकार
पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या वे छत्तीसगढ़ से राज्यसभा जाने पर विचार कर रहे हैं, तो उन्होंने साफ कहा कि जब मध्य प्रदेश में एक सीट उपलब्ध है तो वे छत्तीसगढ़ से क्यों जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि वे न केवल छत्तीसगढ़ या मध्य प्रदेश बल्कि देश के किसी भी राज्य से राज्यसभा नहीं जाएंगे।
उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पांच बार विधायक रह चुके हैं, दो बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। ऐसे में अब नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
नक्सलवाद पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट
नक्सलवाद के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी नक्सलवाद का समर्थन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा का प्रतीक हैं और हिंसा का रास्ता गलत है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि आदिवासी इलाकों में प्रशासनिक लापरवाही और नियमों के उल्लंघन ने नक्सलवाद को पनपने का अवसर दिया। गृह मंत्री Amit Shah द्वारा नक्सलवाद के खात्मे को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि समस्या की जड़ को समझना जरूरी है।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ किए जाने के मुद्दे पर भी उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उनका कहना था कि सरकार के पास ठोस मुद्दे नहीं बचे हैं, इसलिए वह केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी उन्होंने सरकार की आलोचना की। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां किसानों के हितों के खिलाफ हैं और इससे देश आर्थिक रूप से कमजोर हो सकता है।