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छत्तीसगढ़

  • इस गांव पर रोज रात धावा बोलता है लुटेरों का गिरोह: जिसके घर से खाने-पीने की खुशबू मिली, उसकी आई शामत

    इस गांव पर रोज रात धावा बोलता है लुटेरों का गिरोह: जिसके घर से खाने-पीने की खुशबू मिली, उसकी आई शामत

    महासमुंद | वैसे तो पूरा छत्तीसगढ़ इन दिनों कानून व्यवस्था का संकट झेल रहा है। चाकूबाजी, लूटपाट, चोरी-डकैती आम बात हो गई है। इन घटनाओं को लेकर पीड़ित पुलिस के पास जाते हैं, जहां उनकी सुनवाई भी होती है। लेकिन हम यहां आपको ऐसे लुटेरों से परेशान गांव की कहानी पढ़ाने जा रहे हैं, जो ऐसे लुटेरों से परेशान है, जिनके बारे में न तो कोई सुनवाई हो रही है, ना वे पकड़े जा रहे हैं।

    ये कहानी है महासमुंद जिले में बागबाहरा वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत कसेकेरा की। यहां के ग्रामीण ऐसे लुटेरों से परेशान हैं जो इन दिनों लगभग रोज ही 20 से 25 की संख्या में पहाड़ियों से उतरकर गांव पर धावा बोलते हैं और जिसके भी घर का दरवाजा जरा जा भी कमजोर हुआ, समझो उसकी शामत आई। ये लुटेरे दरवाजा तोड़कर घर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं, खाने -पीने की जो भी चीज मिली उसे चट कर जाते हैं। यहां तक कि पीपे में भरा पूरा तेल पी जाते हैं। लुटेरों का ये झुंड इंसानों का नहीं बल्कि भालुओं का है। कसेकेरा गांव में रोज दर्जनों की संख्या में भालू आते हैं और बस्ती के घरों में लूट-पाट कर वापस पहाड़ी पर चले जाते हैं। ऐसी लूट-पाट कभी-कभार नहीं बल्कि कसेकेरा में रोज किसी न किसी घर में घट रही है। इन घटनाओं से ग्रामीण काफी परेशान हैं। लेकिन ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान करने को कोई तैयार नहीं है। रोज-रोज की इस लूट से ग्रामीण डर के साए में जीने को मजबूर हैं।

    पहाड़ियों की तराई पर बसा है गांव

    बागबाहरा वन परिक्षेत्र का ग्राम पंचायत कसेकेरा पहाड़ियों के नीचे बसा हुआ है। इस गांव की आबादी लगभग ढाई हजार है। कसेकेरा गांव वैसे तो भरा-पूरा, सम्पन्न और शांतिप्रिय गांव है, लेकिन 2 साल पहले भालुओं का इस गांव में आना-जाना शुरू हुआ। कोरोना काल में लॉकडाउन के समय पहुंचे इन भालुओं को देख ग्रामीणों को लगा कि ये बागबाहरा के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चंडी माता मंदिर में आने वाले भालू हो सकते हैं, जो भोजन की तलाश में यहां तक आ पहुंचे हैं। लेकिन कुछ दिनों में ग्रामीणों को समझ में आया कि ये मंदिर में आने वाले भालू नहीं बल्कि जंगल के खूंखार भालू हैं। सप्ताह भर बाद इन भालुओं का आतंक गांव में चालू हो गया। ये भालू ग्रामीणों के घरों के दरवाजे तोड़कर घरों में घुसने लगे। फिर ग्रामीणों ने भालुओं की निगरानी शुरू की तब ग्रामीणों को पता चला की भालुओं की संख्या दो-चार नहीं बल्कि बीस से पच्चीस है। भालुओं की इतनी बड़ी संख्या जानकर ग्रामीण दहशत में आ गए। और फिर तभी से जारी है भालुओं की लूटपाट का यह दौर।

    शाम ढलने से पहले घरों में दुबक जाते हैं ग्रामीण

    लुटेरे भालुओं का आतंक ऐसा है कि शाम ढलते ही कसेकेरा गांव के ग्रामीणों के घरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं। लाइट्स जल जाती हैं और गालियां सुनसान हो जाती हैं। पूरे ग्रामीण घरों में दुबक जाते हैं। दिन ढलते ही पहाड़ियों से नीचे अलग अलग रास्ते से उतरकर भालू गांव में पहुंचते हैं। उसके बाद ये भालू जिस किसी के घर से भी कुछ खाने -पीने की खुशबू पा जाते हैं, उसका दरवाजा तोड़कर घर में प्रवेश करते हैं। तब उनके पास चीखने-चिल्लाने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। ग्रामीण चीख चिल्लाकर, पीपा बजाकर भालुओं को भगाने का प्रयास करते हैं। लेकिन ये लुटेरे भालू अब इन सब के आदी हो गए हैं। वे जब तक किचन में रखा तेल, गुड़, चना, आटा आदि खाद्यान्न चट नहीं कर जाते तब तक नहीं भागते हैं। भालुओं ने अब तक 3 दर्जन से ज्यादा घरों के दरवाजे तोड़ डाले हैं।

    काम न आई वन अमले की तरकीब

    वन विभाग ने इन भालुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे भी लगाए। पिंजरा लगाकर महीनों इन्तजार भी किया गया, लेकिन यह तरकीब काम नहीं आई। एक भी भालू पिंजरे में नहीं फंसा। उसके बाद वन विभाग के कर्मी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ कर ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़कर गांव से चले गए। उसके बाद फिर कभी कसेकेरा गांव की ओर किसी भी वनकर्मी ने कभी मुड़कर भी नहीं देखा। हालांकि इस पूरी कहानी का सबसे सुखद पहलू यह है कि भालुओं ने अब तक किसी भी ग्रामीण पर हमला नहीं किया है। जबकि बागबाहरा वन परीक्षेत्र में साल 2019 से अब तक भालुओं के हमले के 52 मामले सामने आए हैं। इन हमलों में 47 लोग घायल हुए और 5 लोगों ने अपनी जान तक गंवाई है।

    प्यास लगने पर कुआं खोदने की बात कर रहे रेंजर साहब

    एक मशहूर उक्ति है, प्यास लगने पर कुआं खोदना। इस पूरे मसले पर बागबहरा के रेजर विकास चंद्राकर की बात भी कुछ ऐसी ही है। वे कहते हैं कि हमने भालुओं को पकड़ने की कोशिश की थी। लेकिन पकड़ नहीं पाए। अब चूंकि भालू ग्रामीणों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं बल्कि वे खाने-पीने की तलाश में गांव का रुख कर रहे हैं। तो इसे रोकने के लिए अब वन विभाग जंगल में कंद, मूल, बेर जैसे फल लगाने की तैयारी में है। ये कंद मूल और फल के पेड़ जब बड़े होकर फलने लगेंगे तो भालू उन्हे खाएंगे और गांव की ओर आना बंद कर देंगे। यानी कि तब तक कसेकेरा वासी यूं ही भालुओं की लूटपाट झेलते हुए दहशत के साए में जीते रहेंगे। वाह भाई रेंजर साहब... क्या मस्त प्लान है आपका।

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  • बड़ी खबर : 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म का आरोप, कारोबारी के खिलाफ मामला दर्ज

    बड़ी खबर : 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म का आरोप, कारोबारी के खिलाफ मामला दर्ज

    रायपुर | पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ का मामला सामने आया है. कारोबारी के खिलाफ पास्को एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है. प्रोग्रेसिव पॉइंट स्थित उड़ान के संचालक शैलेन्द्र रजक पर महिला ने बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है.

    डीडी नगर पुलिस ने जीरो में मामला कायम कर राजेन्द्र नगर थाना ट्रांसफर किया है. पुलिस मामले की विस्तृत विवेचना में जुट चुकी है.

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  • लालबाग मैदान में वॉलीबॉल खेल में हाथ आजमाने लगे सीएम भूपेश बघेल

    लालबाग मैदान में वॉलीबॉल खेल में हाथ आजमाने लगे सीएम भूपेश बघेल

    रायपुर | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दो दिवसीय बस्तर प्रवास के दौरान बीती रात जगदलपुर शहर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में 87 लाख 37 हजार रुपये की लागत से स्थापित की गई हाईमास्ट लाइट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री और विधायकों ने युवोदय के वॉलिंटियर्स के साथ वॉलीबॉल खेल में हाथ आजमाया और युवाओं का उत्साहवर्धन किया।

    इस दौरान बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा, सांसद दीपक बैज एवं राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम, संसदीय सचिव रेखचंद जैन, विधायक कोंडागांव मोहन मरकाम, हस्तशिल्प बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप, विधायक बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, विधायक दंतेवाड़ा देवती कर्मा, विधायक चित्रकोट राजमन बेंजाम, महापौर सफीरा साहू, क्रेडा के अध्यक्ष मिथलेश स्वर्णकार सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

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  • गांजा तस्करी रोकने पहल, ओडिशा-छत्तीसगढ़ की होगी बैठक, निगरानी के लिए चेकपोस्ट

    गांजा तस्करी रोकने पहल, ओडिशा-छत्तीसगढ़ की होगी बैठक, निगरानी के लिए चेकपोस्ट

    रायपुर | पत्त्थलगांव में गांजा तस्करों द्वारा एक रैली पर गाड़ी चढ़ाए जाने की घटना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार गांजा तस्करी रोकने कड़े कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गांजा तस्करी रोकने के लिए ओडिशा और छत्तीसगढ़ के पुलिस अधिकारियों की उच्च स्तरीय संयुक्त बैठक करने के निर्देश दिए हैं। गांजा तस्करी रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने और सीमावर्ती चेक पोस्ट में सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था के साथ ही चौबीस घंटे निगरानी के लिए पुलिस बल तैनात किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के पुलिस महानिदेशक और विशेष पुलिस महानिदेशक नक्सल आपरेशन को इस संबंध में तत्काल आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। छत्तीसगढ़ के सभी सीमावर्ती जिलों में जिनकी सीमाएं ओडिशा राज्य से लगती हैं। वहां के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को स्थाई अधोसंरचना और चेक पोस्ट बनाने को कहा है। इन स्थानों में सीसीटीवी कैमरा की व्यवस्था के साथ ही 24 घंटे पुलिस बल तैनात रहेंगे और निगरानी करेंगे।

    समन्वय बनाने के दिए निर्देश

    बताया गया है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक और विशेष पुलिस महानिदेशक नक्सल आपरेशन को तत्काल इस दिशा में पहल करते हुए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने को कहा है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के पुलिस अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक इंटेलिजेंस के साथ-साथ सीमावर्ती जिले के पुलिस अधीक्षक और ओडिशा पुलिस के उच्चाधिकारी शामिल होंगे।

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  • नाले के पास मिला पति-पत्नी का शव, धारदार हथियार से चोट के निशान

    नाले के पास मिला पति-पत्नी का शव, धारदार हथियार से चोट के निशान

    दंतेवाड़ा | नाले के पास पति-पत्नी का शव बरामद हुआ है. दोनों के गले में चोट के निशान हैं. गले पर धारदार हथियार से वार किया गया है. घटना मुरकी पटेलपारा की है.

    मिली जानकारी के मुताबिक पति रामा ओयाम, पत्नी मासे ओयाम दोनों घर से चावल पिसाने के लिए निकले थे. बाद में दोनों के शव मिलने की सूचना मिली. कोतवाली पुलिस मौके पर मुआयना के लिए पहुंची थी.

    कोतवाली पुलिस ने हत्या की आशंका पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया है. मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है.

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  • एक दर्जन की मौत के बाद महिलाओं ने कर दी गांव में शराबबंदी

    एक दर्जन की मौत के बाद महिलाओं ने कर दी गांव में शराबबंदी

    जगदलपुर | बस्तर के पड़ोसी प्रांत ओडिशा के कोटपाड़ तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत धामनाहांडी में पिछले दो महीने से शराब पूरी तरह से बंद है। संभाग मुख्यालय जगदलपुर से 30 किमी दूर स्थित इस गांव में महिलाओं की सक्रियता लाजवाब है। कोरोना काल में सालभर में शराब पीने से 10-12 लोगों की मौत हो गई। इनमें आधे से अधिक युवा शामिल थे। सरपंच पदमन भंडारी के मुताबिक गांव में 50 जगह देशी शराब बिकता था इसमें एसिड और यूरिया मिला होने से पीने वाले की तबीयत खराब होने लगी और एक साल में दर्जन भर लोग मर गए। युवाओं के ज्यादा मरने से गांव की महिलाओं ने शराबबंदी का संकल्प लिया और सीधी पहुंच गई मंत्री के घर। कोटपाड़ की विधायक और ओड़िशा सरकार में मंत्री पद्मीनी दियान इसी गांव धामनाहांडी की निवासी हैं।

    उन्होंने महिला समूह की सदस्य और गांव की सभी महिलाओं की मंशा को भांपकर तत्काल पुलिस और आबकारी विभाग को गांव में पूर्ण शराबबंदी का आदेश दे दिया। आदेश के बाद गांव में बैठक हुई और मंदिर में ही कमेटी का गठन किया गया। सबसे पहले गांव में कहां-कहां देशी शराब बनती है उसकी लिस्ट बनाई गई।

    सरपंच के मुताबिक 6 पारा में 50 जगह देशी शराब बनने और 2 जगह अंग्रेजी शराब बिक्री की बात सामने आई। उसके बाद पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी और जवानों के साथ गांव की महिलाएं और कमेटी के सदस्य घर-घर पहुंचे और शराब बनाने वालों को आज से ही शराब बंद करने की चेतावनी दे दी। उसके अगले ही दिन से महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया। 100 से 150 महिलाएं रोजाना खाना बनाने के बाद शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक अलग-अलग समुह के साथ सभी 6 पारा के गलियों में दबिश देती है। गांव में स्ट्रीट लाइट है, उसके बावजूद हाथ में टार्च और डंडा होता है।

    पिछले दो महीने में पूरे गांव में शराब पूरी तरह से बंद है। यहां तक कि अगर कोई शराबी दूसरे गांव से या शहर से शराब पीकर आता है, उसकी भी अच्छी से खबर लेते हैं। साथ ही उन्हें साफ शब्दों में चेतावनी दी जाती है कि शराब पीना छोड़ दो, क्योंकि शराब पीकर गांव के 12 लोग एक साल में मर चुके हैं।

    6 पारा में बंटा है धामनाहांडी

    सीआरपीएफ से रिटायर्ड जवान जगबंधु नायक ने बताया कि महिलाओं की जागरूकता के कारण दो माह से पूरी तरह गांव में शराब बंद है। धामनाहांडी निवासी बीजेडी की विधायक पद्मीनी दियान ओड़िशा शासन में कपड़ा, हेंडलूम और हेंडीक्राफ्ट मंत्री हैं उन्होंने भी यह महसूस किया कि शराब गांव के लिए खतरा बन रहा है। उनकी पहल से जहां भी शराब का मामला दिखा तो तुरंत थाना में सूचना देने पर पुलिस कार्रवाई करती है। इसी डर से अब कोई भी गांव में न शराब बनाता है न बेचता है। यह सब गांव की महिला समुह और हर घर से एक-एक महिलाओं के रोजाना गश्त करने का परिणाम है। गांव के 6 पारा तल साई, मातली साई, टिकरा साई, बामन साई, सुंडी साई और हरिजन साई है। जहां अब कोई भी शराब का धंधा नहीं करता।

    मंदिर में होता है झगड़े पर निर्णय

    पिछले दो महीने से महिलाओं के लगातार गश्त करने से पूरा गांव शराब से मुक्त हो गया है, लेकिन शुरुआत में शराब बंद होने से कई लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हो रही थी, इसलिए लड़ाई झगड़ा भी होता रहा। मंदिर में कमेटी की बैठक कर झगड़ा का निपटारा किया गया। ठाकुराणी मंदिर के पुजारी उदय कमेटी के प्रमुख हैं उन्होंने सबको समझाइश दी कि रोजी रोटी के लिए कोई दूसरा धंधा ढूंंढ लो। शराब से हो रही मौत के कारण ही शराबबंदी लागू की जा रही है।

    घर-घर में बिकती थी शराब

    धामनाहांडी गांव पहुंचने पर हरिभूमि ने अनेक लोगों से चर्चा की। बताया गया कि धामनाहांडी लगभग 5 हजार की आबादी वाला कोटपाड़ विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा पंचायत है। कोटपाड़ 4 किमी दूर होने से आसानी से शराब उपलब्ध हो जाता है। वहीं शराब ठेकेदार द्वारा धामनाहांडी के हरेक दुकानों और लोगों के घरों तक शराब पहंुचाई जाती थी। जिसके चलते यह गांव पूरी तरह शराब के नशे में डुबा हुआ था। वहीं गांव के गरीब आदिवासी और अन्य वर्ग के लोग घरों में देशी शराब बना रहे थे। नशा अधिक करने के लिए यूरिया और ऐसिड सहित अन्य तरह के जहरीले पदार्थों को मिलाया जा रहा था। जिसके कारण कई युवा असमय अकाल मौत के शिकार बने। इसमें शराब कारोबारी के साथ दलालों ने भी कमीशन के चक्कर में पूरे गांव में शराब धंधा का जाल फैलाया हुआ था।

    धामनाहांडी बना ओडिशा के लिए उदाहरण

    पूर्ण शराबबंदी लागू कर धामनाहांडी गांव पूरे ओड़िशा के लिए उदाहरण बन गया है। अब कोटपाड़ विधानसभा के अन्य गांव में भी इसी तरह शराबबंदी की पहल पर विचार हो रहा है। ओड़िशा सरकार भी शराबबंदी के लिए पूरा गांव और विशेषकर महिलाओं की भागीदारी से खुश है। संभवत: पूरे राज्य में भी आगे चलकर कुछ नीति बन सकती है।

    - पदमन भंडारी, सरपंच, धामनाहांडी

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  • कलेक्टरों ने नहीं दी अनुमति, कई जिलों में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस नहीं, वक्फ बोर्ड ने कहा-

    कलेक्टरों ने नहीं दी अनुमति, कई जिलों में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस नहीं, वक्फ बोर्ड ने कहा-

    रायपुर | राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में हर साल ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकलने वाला जुलूस-ए मोहम्मदी इस बार नहीं निकाला जाएगा। इस जुलूस का आयोजन करने वाली सीरतुन्नबी कमेटी ने कहा है कि वक्फ बोर्ड के सीईओ के सुझाव पर प्रशासन ने इस बार कोविड की वजह से जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी है। प्रशासन के निर्देश को लेकर समाज में कुछ हद तक सहमति व कुछ लोगों में असहमति भी है, लेेकिन अब ये तय किया जा चुका है कि जुलूस नहीं निकाला जाएगा।

    सीईओ के आदेश का विरोध भी

    वक्फ बोर्ड के सीईओ द्वारा जारी इस आदेश का विरोध मुस्लिम समाज के एक हिस्से से सामने आया है। समाज के कुछ लोगों ने सीईओ के पत्र को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। विरोध जताने के लिए लोगों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया था। सोशल मीडिया के माध्यम से कहा जा रहा था कि सीईओ का पत्र लिखना उचित नहीं है। इस मामले में ये भी कहा जा रहा है कि ईद मिलादुन्नबी के जुलूस को लेकर वक्फ बोर्ड के सीईओ को कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है। यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर का है। सीईओ अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर बात कर रहे हैं।

    ईद मिलादुन्नबी कल

    इस्लाम धर्म के पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिवस के अवसर पर इस बार 19 अक्टूबर को ईद मिलादुन्नबी मनाई जाएगी। इस अवसर पर हर साल राजधानी रायपुर में एक विशाल जुलूस निकाला जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस बार भी समाज के लोग हर्षोल्लास के साथ जुलूस की तैयारी में थे।

    मानेंगे प्रशासन का निर्देश, जुलूस नहीं

    शहर सीरतुन्नबी कमेटी रायपुर के अध्यक्ष मो. नईम रिजवी ने हरिभूमि से चर्चा में कहा कि कोविड के मद्देनजर जिला प्रशासन ने इस साल जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी है। इस संबंध में रायपुर कलेक्टर से चर्चा हो चुकी है। हम लोगों ने तय किया है कि प्रशासन ने जो निर्देश दिया है, उसका पालन किया जाएगा। समाज के बहुत से लोग इस फैसले से सहमत हैं, कुछ लोग असहमत भी हैं।

    अनुमति नहीं दी जानी चाहिए

    ईद मिलादुन्नबी पर हर साल निकाले जाने वाले जुलूस के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के सीईओ ने पिछले दिनों एक रायपुर कलेक्टर को पत्र जारी कर कहा था कि ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के लिए अनुमति न दी जाए। पत्र में कहा गया था कि कोविड- 19 का प्रकोप अभी जारी है, इसलिए सुरक्षात्मक उपाय करने की आवश्यकता है। इसलिए ईद मिलादुन्नबी पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

    जुलूस पर रविवार शाम तक की स्थिति

    बलौदाबाजार में अनुमति नहीं

    कोण्डागांव में अनुमति नहीं

    कवर्धा में अनुमति नहीं

    कांकेर में अनुमति

    महासमुंद में निर्णय नहीं

    जगदलपुर में अनुमति

    दुर्ग में अनुमति नहीं

    धमतरी में निर्णय नहीं

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  • पैरी नदी में समा गए 600 एकड़ खेत, कटाव रोकने छह करोड़ की योजना फाइलों में कैद

    पैरी नदी में समा गए 600 एकड़ खेत, कटाव रोकने छह करोड़ की योजना फाइलों में कैद

    मैनपुर | पैरी नदी के तेज बहाव ने करीब 600 एकड़ जमीन को काट दिया है। हर साल भूमि के कटाव ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। नदीं के तेज बहाब के चलते ग्राम भाठीगढ़, हरदीभाठा, छुईहा, गोपालपुर के किसानों को अपनी जमीनें गंवानी पड़ी है।

    किसानों का कहना है कि गलत तरीके से स्टाप डेम के निर्माण की वजह से स्थिति भयावह हो गई है।

    यहां के किसान रानू साहू, जोहन साहू, भुजबल यादव, बिरबल यादव, आशाराम सहित लगभग दो दर्जन से ज्यादा किसानों ने बताया कि पैरी नदी पुल के नीचे राजीव गांधी राष्ट्रीय जल ग्रहण मिशन द्वारा वर्ष 2003-04 में लाखों रुपए की लागत से एक स्टाप डेम का निर्माण किया गया, जब स्टाप डेम का निर्माण किया जा रहा था, तब क्षेत्र के किसानों ने इसे दूसरे स्थान पर निर्माण करने की मांग की, लेकिन उस समय के राजीव जल ग्रहण मिशन के अधिकारी किसानों की बातों को नजर अंदाज करते हुए इसका निर्माण कर दिया।

    स्टाप डेम निर्माण होने के बाद पहली ही बारिश में पैरी नदी से निकलने वाला पानी, जो पहाड़ी और अन्य छोटी नदियों से मिलकर इसका बहाव तेज हो जाता है, स्टाप के आधे हिस्से को उखाड फेंका। साथ ही 20 से 30 फीट नदी में गहरे गड्ढे हो गए, गलत मापदंड के चलते स्टाप डेम निर्माण किये जाने के कारण यह कटाव बढते गया और धीरे धीरे हरदीभाठा, भाठीगढ, छुईहा, गोपालपुर के लगभग 600 एकड कृषि भूमि को पूरी तरह से निगल लिया। यह कृषि भूमि नदी में तब्दील हो गया, इस मामले को लेकर क्षेत्र के किसान भड़क उठे और आंदोलन किए तो भूमि संरक्षण विभाग द्वारा अपनी भूल को छिपाने के लिए स्टाप डेम का जो आधा हिस्सा बचा था, उसे जेसीबी मशीन से जाकर रातों रात गायब कर दिया।

    पूर्व मुख्यमंत्री से लगाई थी गुहार

    प्रभावित किसानों ने पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह से मुलाकात करते हुए इस समस्या की जानकारी उन्हें दी थी। इसके बाद बकायदा राज्य स्तर के अधिकारियों के टीम ने पूरे नदी का पैदल निरीक्षण किया। जल संसाधन विभाग तथा कृषि विभाग के अधिकारियों के द्वारा नदी किनारे कटाव को रोकने के लिए तटबंध बनाने के लिए लगभग 08 वर्ष पहले 10 करोड़ रुपए के स्टीमेट बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया था, लेकिन अब तक राशि स्वीकृत नहीं होने से तटबंध का निर्माण नही हो पाया और नदी किनारे कटाव का सिलसिला लगातार जारी है। किसानों ने बताया कि पूर्व भाजपा सांसद चन्दुलाल साहू, पूर्व कांग्रेस के विधायक कुमार ओंकार शाह, पूर्व भाजपा के विधायक गोवर्धन मांझी, गरियाबंद जिला के तत्कालीन कलेक्टर निलेश क्षीरसागर तथा सिंचाई विभाग के कई आला अफसर, कृषि विभाग के अधिकारी पैदल स्थल निरीक्षण कर चुके हैं, कई बार स्टीमेट प्रस्ताव बनाकर भेज चुके हैं, अब तक कुछ भी नहीं हुआ है।

    किसानों ने लगाई मुख्यमंत्री से गुहार

    हरदीभाठा, भाठीगढ, गोपालपुर, छुईहा पैरी नदी में प्रभावित किसान तथा तुहामेंटा खजरान नाला के प्रभावित किसान अमृतलाल नागेश, पिलेश्वर सोरी, रामसिंह, सुकलाल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से गुहार लगाई है कि उनकी हर साल करोड़ों की जमीन जो नदी में तब्दील हो रही है, उसे नरवा, घुरवा, गरुवा और बाड़ी जैसे महत्वकांक्षी योजना में शामिल करते हुए नदी के दोनों तरफ तटबंध बनवाया जाए, जिससे किसानों की जमीन बर्बाद होने से बच सके और नदी में तब्दील हो चुके जमीनों के सीमांकन व नाप कर उसे मनरेगा योजना के तहत सुधार करवाई जाए।

    क्या कहते हैं अफसर

    जल संसाधन विभाग के एसडीओ दीपक कुमार पाठक ने बताया कि लगभग 05-06 वर्ष पहले नदी किनारे तटबंध निर्माण के लिए स्थल निरीक्षण के बाद बकायदा स्टीमेट बनाकर भेजा गया था, लगभग 06 करोड़ रुपए का स्टीमेट भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अब तक कार्य नहीं हो पाया है। श्री पाठक ने आगे बताया कि फिर धान कटाई के बाद स्टीमेट बनाकर भेजा जाएगा।

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  • तीन मंत्रियों ने ली अफसरों की क्लास, डहरिया ने कहा- अस्पताल को बना रखा है मजाक

    तीन मंत्रियों ने ली अफसरों की क्लास, डहरिया ने कहा- अस्पताल को बना रखा है मजाक

    अम्बिकापुर | पिछले 36 घंटे में एसएनसीयू समेत अस्पताल के शिशु वार्ड में चार बच्चों की मौत और दो की सूचना से हंगामा मचा हुआ है। बच्चों की मौत के बाद परिजनो ने इलाज मे लापरवाही का आरोप लगाया है। इसे गंभीरता से लेते हुए टीएस सिंहदेव दिल्ली से लौट आए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच भवन में एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया व लगातार चार मौतों के बारे में जानकारी ली।

    इस दौरान उन्होंने डीन डा. आर मूर्ति, अधीक्षक डॉ. लखन सिंह व विभाग के एचओडी डॉ. जेके रेलवानी से बच्चों को दिए गए उपचार व एसएनसीयू में बच्चों की स्थिति की जानकारी ली और फिर बन्द कमरे में प्रबंधन के साथ बैठक की।

    इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि एक साथ चार मौतें होना चिंताजनक है। आज भी दो और मौतों की जानकारी मिली थी लेकिन वे बच्चे नियोनेटल नही थे। उन्होंने कहा, अगर निरंतर मौतें हो रही हैं तो इसका कारण जानने आया था कि कही आक्सीजन की कमी तो नही थी। वजन कम होने, प्री मेच्योर व अन्य कारणों से सामान्य से ज्यादा मौतें देखने को मिलती है लेकिन एक साथ चार मौतें चौकाने वाली है क्योंकि ये आंकड़े सामान्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिवर्ष 6 लाख बच्चों का जन्म हो रहा है और उनमें से 22 हजार बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती होना पड़ रहा है। वजन कम व समय से पहले जन्म के कारण मौतें हो रही है और सिर्फ एक अस्पताल नहीं बल्कि रायपुर, सरगुजा व जगदलपुर में मौत का प्रतिशत अधिक है। इसके कारणों का गहराई से पता लगाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गर्भवती माताएं आ रही हैं तो यह देखना होगा कि उन्होंने एचबी टेस्ट कराया है या नही। कुछ जगहों पर देखा जा रहा है कि पहले तीन माह तक महिलाएं गर्भधारण की जानकारी नही दे पाती है। महिलाओं में आयरन, एचबी टेस्ट व अन्य बुनियादी चीजों को लेकर पहल करनी होगी। महिलाओण का एचबी काउंट कराना जरूरी है। इसके साथ ही नियमित एएनसी चेकअप व जन्म के बाद बच्चों के देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है।

    लापरवाही पर होगी कार्रवाई

    मरीज के परिजन द्वारा समय समय पर लगाए जाने वाले लापरवाही के आरोप व रिफर करने की शिकायत पर उन्होंने कहा कि अस्पताल में बिस्तर की संख्या 30 हो गई है और इसे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार मरीज आ रहे हैं, इससे दबाव बना है। कोई भी नही चाहता कि मृत्यु हो फिर भी अगर परिजन कह रहे है तो उनसे भी पूछा जाएगा और लापरवाही पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

    एमसीएच का किया निरीक्षण, सिंहदेव के साथ बैठक कर लगाई फटकार

    मेडिकल कॉलेज के एमसीएच स्थित एसएनसीयू में एक साथ 4 बच्चों की मौत को लेकर प्रदेशभर में मचे बवाल के बाद रात प्रदेश के नगरीय प्रशासन व जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया भी सरगुजा पहुंचे। मंत्री डॉ. डहरिया के साथ खाद्यमंत्री अमरजीत भगत भी मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच भवन का निरीक्षण किया

    व एसएनसीयू व प्रसूति वार्ड में बच्चों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। अस्पताल के निरीक्षण के बाद मंत्री डॉ. डहरिया सीधे प्रबंधन की बैठक ले रहे स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के पास पहुंचे व अधिकारियों से घटना को लेकर जानकारी ली। बैठक में पहुंचते ही मंत्री डॉ. डहरिया ने कड़ी नाराजगी जताते हुए 15 व 16 अक्टूबर को मरने वाले बच्चों की संख्या व मौत के कारणों की जानकारी मांगी। जिस पर डीन डॉ. मूर्ति व अन्य चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे लो बर्थ, प्री मैच्योर थे और उन्हें अन्य कॉम्प्लिकेशन भी थी। मंत्री डॉ. डहरिया ने कहा कि अस्पताल में 15 दिन में 37 मौतें हुई है जो बहुत ज्यादा हैं।

    इस पर अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में 139 एडमिशन हुए जिसमें से 37 मौतें हुई हैं। इनमें से 19 न्यू बोर्न बच्चे हैं। डॉ. डहरिया ने कड़े लहजे में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि घटना के दिन कौन कौन डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई थी इसके साथ ही पिछले 15 दिन के डॉक्टरों का ड्यूटी चार्ट उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही होने वाली मौतों की रिपोर्ट भी बनाकर दी जाए।

    उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव से कहा कि उस दिन अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था। उस दिन चार प्रोफेसर की ड्यूटी थी लेकिन कोई नही था। यहां एक जिम्मेदार डॉक्टर को हमेशा रहना चाहिए। इस बात की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

    इस दौरान विधायक डॉ. प्रीतम राम, पादप बोर्ड के अध्यक्ष बाल कृष्ण पाठक, श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शफी अहमद, 20 सूत्रीय क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, मेयर डॉ. अजय तिर्की, जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, जेपी श्रीवास्तव व अन्य मौजूद थे।

    साफ सफाई पर भी नाराजगी

    बैठक में उन्होंने साफ सफाई को लेकर नाराजगी जताई। अस्पताल में चारों तरफ गंदगी है। इसे लेकर उन्होंने डीन से सवाल किया। मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि अस्पताल में मरीज के परिजन के अनियमित आगमन को सुधारना होगा। अस्पताल के पाइप लाइन में बोरी, चादर, सेनेटरी पेड निकल रहा है। बोरी और चादर कौन डालता है।

    आवश्यकताओं को पूर्ण करने का आश्वासन

    मंत्री डॉ. डहरिया ने कहा कि हेल्थ डिपार्टमेंट को 8 करोड़ रुपए दिया जाता है। प्रोफेसर की जरूरत है तो ले आओ, वेतन हम देंगे। चिकित्सकों ने अस्पताल में वार्मर व बेड की संख्या बढ़ाने की मांग की जिसपर उन्होंने व्यवस्थाओं में सुधार करने व संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। एमसीएच व जिला अस्पतालों में बेड व वार्मर की व्यवस्था की जाएगी।

    सिंहदेव ने कहा -उपलब्ध कराएं फुटेज

    इधर घटना को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि आप कह रहे हैं डॉक्टर थे ,तो मंत्री जी के पास जानकारी कैसे है कि कोई नहीं था। इसका मतलब किसी ने बताया। इसलिए उस दिन का सीसीटीवी फुटेज मंत्री जी को उपलब्ध कराएं व 15 दिनों का डाटा दें।

    डॉक्टर से बुलाकर पूछताछ

    आज बैठक के दौरान उस ड्यूटी डॉक्टर को बुलाकर पूछताछ की जिसपर उन्होंने बताया कि उस रात वे ड्यूटी पर थी व बच्चों को देखने के साथ ही उनकी रिपोर्ट लिखी थी व परिजन को भी वस्तुस्थिति से अवगत कराया था। इस पर मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि रायपुर व जगदलपुर की तुलना में यहां मौत का प्रतिशत 28 है लेकिन यह भी अधिक है। इसे कम करने की जरूरत है। वहीं मंत्री डॉ. डहरिया ने कहा कि सीएमएचओ सभी निजी हॉस्पिटल की भी सारी जानकारी रखें। कितना रिफर निजी अस्पताल से आया है। बोलने से काम नहीं चलेगा। पूरी जानकारी लेनी पड़ेगी, इसकी जिम्मेदारी सीएमएचओ की है।

    पुराने समय के लोग कर रहे नेतागिरी

    बैठक में मंत्री सिंहदेव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अस्पताल में अभी भी पुराने समय के लोग नेतागिरी कर रहे हैं। रिटायर होने के बाद भी कश्यप नामक बाबू खुलेआम घूम रहा है कब्जा करके बैठा है।

    अब एमएस व एचओडी की एक साथ छुट्टी नहीं

    बैठक के दौरान डॉ.डहरिया ने कहा कि यह प्रशानिक लापरवाही है। नर्स उस दिन मरीज देख रही थी। इतनी बड़ी घटना हो रही है,देश में छप रहा है और बदनामी सरकार की हो रही है। उन्होंने कहा कि त्यौहार मनाना ठीक है लेकिन लापरवाही नही चलेगी। अब अस्पताल के एमएस व एचओडी एक साथ एक दिन छुट्टी पर नहीं जाएंगे।

    एमएस से पूछा आप कहां थे

    डॉ. डहरिया ने मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक से पूछा कि आप घटना के दिन कहा थे। शिकायत ये है कि उस दिन अस्पताल में ड्यूटी पर कोई डॉक्टर नहीं था। नर्स जिम्मेदारी संभाल रही थी। उस दिन कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं आया। अस्पताल में पूरी नेगलिजेंसी है। अस्पताल को आप लोगों ने मजाक बनाकर रखा है। डॉक्टरों द्वारा ड्यूटी की दलील देने और उन्होंने कहा कि उस दिन के साथ ही सभी दिन का अटेंडेंस रजिस्टर निकाला जाए। अब अस्पताल में डॉक्टर के नर्स सहित अन्य स्टाफ की हाजरी ऑनलाइन लगेगी।

    भूपेश के निर्देश पर डहरिया भी पहुुंचे

    बच्चों की मौत को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेहद संवेदनशीलता से लिया। उन्होंने अंबिकापुर के प्रभारी मंत्री शिव डहरिया को तत्काल रवाना कर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि हालात का तत्काल जायजा लें और इलाज की बेहतर से बेहतर व्यवस्था की जाए। श्री बघेल के निर्देश के बाद श्री डहरिया तत्काल रवाना हो गए। वहां पहुंचकर उन्होंने मीटिंग ली। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और खाद्यमंत्री अमरजीत भगत भी मौजूद रहे।

    मेटर्नल मोर्टिलिटी रेट 100 के ऊपर

    स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में भी मेटर्नल मोर्टिलिटी रेट (एमएमआर) अभी प्रदेश में प्रतिवर्ष 100 के ऊपर है। शिशु मृत्यु दर की बात करें तो 5 साल से ऊपर 46, 5 वर्ष से 1 वर्ष के बीच 41 प्रतिशत व उससे नीचे काफी कम है लेकिन अभी भी इसमें सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि एक अस्पताल नही बल्कि प्रदेश में मुहिम चलाकर सुधार करना पड़ेगा। दूसरों से बेहतर आंकड़े देखकर खुश होने के बजाए अपनी व्यवस्था को और कैसे सुधार जाए इस पर दिन देने की आवश्यकता है।

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  • दशहरा-दीपावली मिलन में विधायक ने पत्रकारों में बांट दी स्वेच्छानुदान की राशि

    दशहरा-दीपावली मिलन में विधायक ने पत्रकारों में बांट दी स्वेच्छानुदान की राशि

    कोरिया | गरीब व जरूरतमंदों को निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा दी जाने वाली जनसंपर्क व स्वेच्छानुदान निधि की राशि मनेंद्रगढ़ विधायक विनय जायसवाल ने पत्रकारों में बांट दी। विधायक जायसवाल ने अपने चिरमिरी स्थित निवास में पत्रकारों को दशहरा दीपावली मिलन के नाम पर आमंत्रित किया वहां पत्रकारों को भेंट के तौर पर विधायक जनसंपर्क निधि की राशि का चेक वितरित किया गया विधानसभा क्षेत्र के लगभग 60 पत्रकारों को पांच-पांच हजार रुपये की राशि का चेक वितरित किया गया। पत्रकारों को वितरित किए गए चेक में कोरिया जिले के अपर कलेक्टर के हस्ताक्षर हैं।

    पूर्व में महिला कांग्रेस अध्यक्ष को दी थी स्वेक्षानुदान की राशि

    गौरतलब है कि मनेन्द्रगढ़ विधायक विनय जायसवाल ने डेढ़ साल पहले मनेन्द्रगढ़ की महिला कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष को शिक्षा के नाम पर स्वेक्षानुदान की राशि वितरित की थी। विधायक ने महिला कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष के साथ ही महिला कांग्रेस नेत्रियों व कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ही स्वेक्षानुदान कि राशि वितरित की थी। लेकिन किरकिरी होने पर महिला कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष ने उस राशि को गरीबों को वितरित किया था।

    त्योहार में पत्रकारों को उपहार देना गलत नही है। लेकिन व्यक्तिगत वाहवाही लूटने के लिए मीडिया में चेहरा चमकाने के लिए सरकारी खजाने का दुरुपयोग करना गलत है।

    श्यामबिहारी जायसवाल, पूर्व विधायक

    ये मेरा अधिकार है

    जिले के भाजपा के विधायक जनसम्पर्क व स्वेच्छानुदान का उपयोग अपने लिए कपड़े खरीदने घर की साज सज्जा के लिए करते थे। मैंने तो लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ जो जरूरतमंद है उनको उपहार दिया है। यह राशि उनके काम आएगी। जनसम्पर्क और स्वेक्षानुदान कि राशि कहां देनी है ये मेरा अधिकार है।

    -विनय जायसवाल, विधायक

    फाइल देखकर...

    विधायक जिन नामों की अनुशंसा करते हैं उनके नाम से विधायक जनसपंर्क निधि की राशि का चेक प्रशासन जारी करता है। इस विषय मे विस्तृत जानकारी फाइल देखकर दे पाऊंगा।

    -श्याम धावड़े, कलेक्टर

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  • जशपुर की घटना को राजनीतिक रंग देने वाले भाजपाई अब भोपाल की घटना पर क्या कहना चाहेंगे?

    जशपुर की घटना को राजनीतिक रंग देने वाले भाजपाई अब भोपाल की घटना पर क्या कहना चाहेंगे?

    रायपुर | जशपुर के पत्थलगांव सड़क हादसे पर मुआवजे को लेकर जमकर राजनीति हुई। अब भोपाल में दुर्गा विसर्जन के दौरान हुए हादसे पर छत्तीसगढ़ में सियासी तीरें खींचनी शुरू हो गई है।

    छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता आरपी सिंह ने डॉ रमन सिंह और प्रदेश के भाजपा नेताओं से यह सवाल पूछा है कि जशपुर की सड़क दुर्घटना को पहले धार्मिक रंग और अब राजनीतिक रंग देने वाले लोग अब भोपाल की घटना पर क्या कहना चाहेंगे ?

    आरपी सिंह ने पूछा है कि क्या डॉक्टर रमन सिंह अपने साथियों के साथ भोपाल जाकर नेशनल हाईवे जाम करेंगे जैसा कि उनके सहयोगियों ने जशपुर में किया और आम जनता का जीवन कष्ट में डाला?

    क्या नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक जी इसे हिंदू समाज पर हमला बताने का साहस दिखाएंगे?

    क्या प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ की तरह भोपाल जाकर मृतक परिवार के परिजनों के लिए एक करोड रुपए और घायलों के लिए 50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग उठाएंगे?

    क्या बहन सरोज पांडे जी अस्पताल से वीडियो बनाकर घायलों के परिजनों के लिए एक करोड़ रुपए और न्यायिक जांच की मांग उठाएंगी?

    क्या बीजेपी के आईटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित मालवीय इस घटना को धार्मिक रंग देकर मध्य प्रदेश की जनता को भड़काने का प्रयास करेंगे ?

    क्या मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नेता इस घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकालेंगे?

    जाहिर सी बात है इनमें से किसी के पास इतना नैतिक साहस नहीं है की ये मध्यप्रदेश के भोपाल में घटित घटना की आलोचना भी कर सकें और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मांग करें। कांग्रेसी प्रवक्ता आर पी सिंह ने कहा है कि घटना चाहे जशपुर की हो या भोपाल की दोनों ही दुखद है और महज सड़क दुर्घटनाएं हैं।

    इस तरह की दुखद घटना के ऊपर राजनीति करना उन लोगों को शोभा देता है जिन लोगों का जमीर मर चुका है और नैतिकता बची नहीं है। लाशों पर राजनीति करने वाली भाजपा को जनता ने नकार दिया है।

    आरपी सिंह ने कहा है कि मुझे पूरी उम्मीद है कि आज दोपहर 1ः00 बजे भाजपा द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में जशपुर का मुद्दा उठाने से पहले भोपाल की घटना का जिक्र और कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब डॉ रमन सिंह धरमलाल कौशिक और विष्णु देव साय जरूर देंगे।

    बता दें कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सिरफिरे ने दुर्गा विसर्जन के लिए जा रही भीड़ पर कार चढ़ा दी। इस दर्दनाक हादसे में 2 लोग घायल हो गए। भोपाल के बजरिया थाना क्षेत्र में शनिवार रात करीब 11:15 पर हुई इस घटना से हड़कंप मच गया। तेज रफ्तार कार पीछे से जुलूस में घुसा दी। भगदड़ मचने के बाद तेजी से कार रिवर्स कर भाग निकला। लोगों ने कार चालक को पकड़ने का प्रयास भी किया लेकिन वह घटनास्थल से फरार हो गया। बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

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  • सीएम भूपेश बघेल पहुंचे जगदलपुर, एयरपोर्ट में कर रहे लगेज कन्वेयर बेल्ट का शुभारंभ

    सीएम भूपेश बघेल पहुंचे जगदलपुर, एयरपोर्ट में कर रहे लगेज कन्वेयर बेल्ट का शुभारंभ

    जगदलपुर | सीएम भूपेश बघेल जगदलपुर पहुँच चुके हैं. सीएम भूपेश बघेल जगदलपुर एयरपोर्ट में लगेज कन्वेयर बेल्ट का शुभारम्भ कर रहे हैं. कुछ देर बाद सीएम भूपेश बघेल दंतेश्वरी मंदिर के लिए रवाना होंगे.

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब मुरिया दरबार पहुँच गए हैं. सीएम ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. कार्यक्रम में आबकारी मंत्री कवासी लखमा, बस्तर सांसद दीपक बैज, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव भी उपस्थित हैं.

    इसके पूर्व सीएम भूपेश बघेल आज सुबह धमतरी गए थे. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के निवास पहुंचे थे. रामगोपाल अग्रवाल के पिता का निधन हो गया है. सीएम ने शोकाकुल परिवार से मिलकर सांत्वना दिया.

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