बेमेतरा: जिले के बिरनपुर हिंसा मामले में तीन साल बाद अदालत का बड़ा फैसला सामने आया है। जिला एवं सत्र न्यायालय बेमेतरा ने हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए सभी 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
क्या था बिरनपुर हिंसा मामला
बिरनपुर में हिंसा की शुरुआत दो बच्चों के बीच हुई मामूली कहासुनी से हुई थी। यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ते हुए हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच गंभीर हिंसक झड़प में बदल गया।8 अप्रैल 2023 को साजा से विधायक ईश्वर साहू के 22 वर्षीय पुत्र भुनेश्वर साहू की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
छत्तीसगढ़ बंद और हालात बेकाबू
इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया। 10 अप्रैल 2023 को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया। बंद के दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया, आगजनी की घटनाएं हुईं और स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई।
खेत में मिले पिता-पुत्र के शव
हिंसा के बीच कोरवाय गांव के खेत में बकरी चराने वाले पिता-पुत्र रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद के शव बरामद किए गए। इस दोहरी हत्या ने मामले को और गंभीर बना दिया। प्रशासन ने तत्काल धारा 144 लागू की और करीब दो सप्ताह तक इलाके में कर्फ्यू रहा।
CBI जांच और चार्जशीट
मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई। 30 सितंबर 2025 को दाखिल चार्जशीट में सीबीआई ने स्पष्ट किया कि यह घटना किसी राजनीतिक साजिश का नतीजा नहीं थी। जांच में पूर्व विधायक अंजोर यदु का नाम भी शामिल नहीं पाया गया, जबकि इस पर लंबे समय तक आरोप लगाए जाते रहे।
कोर्ट का फैसला और सियासी असर
तीन साल तक चली सुनवाई के बाद जिला सत्र न्यायालय बेमेतरा ने सबूतों के अभाव में हत्या के सभी 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
इस मामले को लेकर जमकर सियासत भी हुई। बीजेपी ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण के आरोप लगाए, जबकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की साजिश बताया। फरवरी 2024 में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने विधानसभा में CBI जांच की घोषणा की थी। बाद में ईश्वर साहू को भाजपा ने टिकट दिया और वे वर्तमान में साजा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।