छत्तीसगढ़ विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार और उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने गृह मंत्री विजय शर्मा का ध्यान इस गंभीर सामाजिक समस्या की ओर आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नशा माफियाओं का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और हालात भयावह होते जा रहे हैं।
विपक्ष का सवाल: कार्रवाई काफी नहीं, समाज को भी बचाना जरूरी
अजय चंद्राकर ने कहा कि गृह विभाग केवल कार्रवाई के आंकड़े पेश कर रहा है, लेकिन असली चुनौती समाज से नशा खत्म करने की है। उन्होंने सामाजिक न्याय विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि गांजा और नशीली सिरप के सेवन करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है, खासकर बलरामपुर और बस्तर जैसे जिलों में। उन्होंने सवाल उठाया कि नशे के उपयोगकर्ताओं की संख्या क्यों बढ़ रही है और इसके मूल कारणों पर सरकार क्या कर रही है।
गृह मंत्री का जवाब: अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, आर्थिक चोट भी
गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन को बताया कि राज्य सरकार अब नशे के खिलाफ केवल पकड़-धकड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि माफियाओं पर आर्थिक कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर में नशे से जुड़े मामलों में 16 स्थानों पर करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसके लिए 100 पद स्वीकृत किए गए हैं। इन पदों पर अलग से भर्ती नहीं होगी, बल्कि पुलिस बल के भीतर से ही पदस्थापना की जाएगी। रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, सरगुजा और राजनांदगांव सहित कई जिलों में यह टास्क फोर्स सक्रिय रूप से काम कर रही है। अब तक 250 से अधिक वाहनों को जब्त कर उनकी नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
NDPS और SAFEMA के तहत सख्ती
गृह मंत्री ने बताया कि NDPS एक्ट के तहत SAFEMA कोर्ट में भी कार्रवाई की जा रही है। यह कदम विष्णुदेव साय सरकार में पहली बार उठाया गया है, जिससे नशा कारोबार से जुड़े लोगों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जनजागरूकता और विभागीय समन्वय पर जोर
अजय चंद्राकर ने शैक्षणिक परिसरों के आसपास नशे की उपलब्धता को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए पूछा कि जनजागरूकता के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
इसके जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि नशे का व्यापार करने वालों को पकड़ना पुलिस का काम है, लेकिन मेडिकल और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की भी अहम भूमिका होती है। नार्कोटिक्स को-ऑर्डिनेशन की बैठकों के जरिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाकर सामाजिक स्तर पर नशा उन्मूलन की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।