रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में जहां एक ओर लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से बाहर होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजधानी के कई इलाकों में गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंदौर में गंदे पानी से बच्चों की मौत की घटना के बाद भी रायपुर नगर निगम सबक लेता नजर नहीं आ रहा है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी:
स्थानीय लोगों के मुताबिक राजधानी की सेल्स टैक्स कॉलोनी, गायत्री नगर, पिंक सिटी, स्टील सिटी जैसे पॉश और घनी आबादी वाले इलाकों में पिछले एक महीने से बदबूदार और काला पानी नलों से आ रहा है। कई घरों में पानी की हालत नाली के पानी जैसी बताई जा रही है।
बच्चे बीमार, परिवारों पर बढ़ा आर्थिक बोझ:
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि गंदा पानी पीने से कई बच्चे बीमार पड़े, कुछ बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, घरों के वॉटर फिल्टर दो-दो बार बदलने पड़े इसके साथ ही कई परिवार मजबूरी में रोजाना 250 से 300 रुपये खर्च कर पानी के कंटेनर खरीद रहे हैं, जिससे महीने का खर्च 8 से 10 हजार रुपये तक पहुंच गया है।
“पानी में मरी मछली जैसी बदबू”-महिलाओं का दर्द
पिंक सिटी और गायत्री नगर की महिलाओं का कहना है कि नलों से आने वाले पानी में मरी हुई मछली जैसी बदबू आती है। पानी उबालकर पीना पड़ रहा है। नहाने तक के लिए कंटेनर का पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
जोन विवाद बना बहाना, समस्या जस की तस:
स्थानीय लोगों के अनुसार पानी की टंकी जोन-9 में और प्रभावित इलाके जोन-3 में होने की वजह से निगम के भीतर समन्वय की कमी सामने आ रही है। हालांकि निगम अधिकारियों ने गंदा पानी आने की बात स्वीकार की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
लोगों का सवाल: क्या मौत के बाद ही जागेगा निगम
इंदौर जैसी दर्दनाक घटना के बाद भी अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। इलाके के लोगों का सीधा सवाल है, 'क्या रायपुर नगर निगम किसी की जान जाने के बाद ही गंभीर होगा।'