छत्तीसगढ़ के पवित्र तीर्थ नगर राजिम में आयोजित 15 दिवसीय राजिम कुंभ कल्प का महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भव्य समापन हुआ। देशभर से पहुंचे साधु-संतों, महात्माओं और नागा साधुओं ने आस्था और श्रद्धा के साथ त्रिवेणी संगम राजिम में शाही स्नान कर धार्मिक वातावरण को दिव्य बना दिया।
शाही स्नान से गूंजा पूरा तीर्थ क्षेत्र:
समापन दिवस पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शाही स्नान से पहले साधु-संतों की टोलियां नगर भ्रमण पर निकलीं और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। भगवान दत्तात्रेय की पालकी पूजा के बाद नागा साधुओं ने सबसे पहले कुंड में स्नान किया, जिसके पश्चात अयोध्या और वृंदावन सहित विभिन्न अखाड़ों से आए संतों ने पवित्र डुबकी लगाई।
जनप्रतिनिधियों और संतों की रही विशेष मौजूदगी:
धार्मिक आयोजन में प्रदेश के जनप्रतिनिधि और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए तथा संत समाज के साथ शाही स्नान कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। संतों ने राजिम को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी तुलना प्रयागराज में मिलने वाले पुण्य से की।
आकर्षण का केंद्र बनी संत-महात्माओं की टोली:
26 राज्यों के अनुयायियों के साथ खैरा के भैरवी धाम से पहुंची सुमिरन माई की टोली श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। संतों ने राजिम कुंभ कल्प को देश के प्रमुख कुंभ आयोजनों के समान महत्व का बताते हुए इसे आध्यात्मिक चेतना का विराट पर्व कहा।