Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि का पर्व इस साल 15 फरवरी यानि की कल मनाया जाएगा। इस दिन लोग महादेव को खुश करने के लिए पूजा पाठ और उपवास करते है। तो वही मंदिरों में सुबह से ही महादेव के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाता है। कहा जाता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने से महादेव खुश होते है और अपनी विशेष कृपा बरसाते है। अगर आप भी इस शिवरात्रि भगवान शिव की विशेष कृपा पाना चाहते है तो कुछ चीजों को भूलकर भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं। नहीं तो भोलेनाथ रूठ जायेंगे और आशीर्वाद पाप बन जायेगा। तो चलिए, जानते हैं उन चीजों के बारे में जिन्हें महादेव को अर्पित नहीं करना चाहिए।
पूजा में न करें शंख का उपयोग
शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना वर्जित माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था, जिससे शंख की उत्पत्ति जुड़ी मानी जाती है। इसलिए शिवलिंग पर जल या दूध सीधे पात्र से ही अर्पित करना चाहिए।
केतकी का फूल
पौराणिक कथा के अनुसार, केतकी के फूल ने ब्रह्मा जी के कहने पर भगवान शिव से झूठ बोला था। तब से महादेव ने केतकी के फूल को शिवलिंग पर चढ़ाने से मना कर दिया।
नारियल:
महादेव का अभिषेक नारियल के जल से नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आर्थिक तंगी आ सकती है।
चावल या अक्षत का इस्तेमाल करने से बचें
शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर चावल या अक्षत चढ़ाना वर्जित माना गया है. अक्षत यानी बिना टूटे चावल का इस्तेमाल कुछ विशेष देवी-देवताओं की पूजा में किया जाता है, लेकिन भगवान शिव की पूजा में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता.
कमल का फूल
कमल का फूल भी शिवजी को नहीं चढ़ाना चाहिए। यह फूल भगवान विष्णु को प्रिय होती है।
कंटकारी फूल
भगवान शिव को कोई भी कंटकारी फूल या कांटेदार फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से घर-परिवार में कलह-क्लेश उत्पन्न होते हैं।
सिंदूर:
शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग पर सिंदूर चढ़ाना नहीं चाहिए क्योंकि सिंदूर का संबंध सुहागिन महिलाओं से है।
तुलसी:
मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने असुर जालंधर ( जो माता तुलसी के पति थे ) उनका वध किया था । तभी से शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते नही चढ़ाए जाते। ऐसा करने से महादेव रूठ जाते है.
हल्दी:
भगवान शिव तपस्वी थे और राख का ही उपयोग करते थे, जबकि हल्दी विवाह जैसे मांगलिक कामों में इस्तेमाल होती है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी लगाना वर्जित है।