NCERT Book Controversy: ‘नई दिल्ली। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा कानूनी मुद्दा बन गया है। National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने अध्याय को वापस लेने और बिना शर्त माफी मांगने की घोषणा की है, लेकिन इसके बावजूद Supreme Court of India ने पूरी किताब पर ब्लैंकेट बैन लगा दिया है।
क्या है पूरा मामला:
NCERT ने हाल ही में कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका की चुनौतियों से संबंधित एक अध्याय जोड़ा था। इसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और न्याय मिलने में देरी जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था। अध्याय के प्रकाशित होते ही इस पर विवाद शुरू हो गया। आलोचकों का कहना था कि यह सामग्री बच्चों के मन में न्यायपालिका के प्रति नकारात्मक धारणा बना सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश:
मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पुस्तक की सभी हार्ड कॉपी, डिजिटल और सॉफ्ट कॉपी और ऑनलाइन उपलब्ध संस्करण तुरंत प्रभाव से हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए। साथ ही, NCERT के निदेशक और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
कोर्ट की मुख्य आपत्तियां:
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अध्याय में न्यायपालिका के सकारात्मक योगदान को नजरअंदाज किया गया। बच्चों के मन में एकपक्षीय धारणा बैठाने का प्रयास प्रतीत होता है। जब सामग्री व्यापक रूप से प्रसारित हो चुकी है, तो बाद में माफी का क्या अर्थ? अदालत ने यह भी पूछा कि इस अध्याय को मंजूरी देने वाली समिति के सदस्य कौन थे।
NCERT का पक्ष:
NCERT ने अदालत में बताया कि करीब 2 लाख किताबें वापस मंगाई जा चुकी हैं। विवादित अध्याय को हटाया जा चुका है। बिना शर्त माफी दी गई है। सरकार की ओर से दलील दी गई कि अध्याय का उद्देश्य न्याय में देरी जैसी समस्याओं को समझाना था, न कि न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाना।
अध्याय में क्या था उल्लेख?
विवादित हिस्से में बताया गया था कि 2017 से 2021 के बीच न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी 1600 शिकायतें दर्ज हुईं। सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000 मामले लंबित हैं। हाईकोर्ट में 62 लाख से अधिक और निचली अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं। इन्हीं आंकड़ों और भाषा शैली पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।
अगली सुनवाई कब?
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। राजनीतिक प्रतिक्रिया इस विवाद पर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इसे शिक्षा सामग्री में बदलाव और इतिहास को अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने के व्यापक मुद्दे से जोड़ा है। कक्षा 8 की पुस्तक में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय ने शिक्षा और न्याय व्यवस्था के संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है। जहां NCERT ने अध्याय हटाकर माफी मांग ली है, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका की छवि और संवैधानिक गरिमा से समझौता नहीं किया जाएगा।