Arvind Kejriwal acquitted by court: दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। Arvind Kejriwal को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है। फैसले के बाद वे मीडिया से बात करते हुए भावुक नजर आए और कहा कि उनके खिलाफ बनाया गया पूरा केस “फर्जी” था। यह फैसला Rouse Avenue Court ने सुनाया, जिसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia को भी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि ठोस और पर्याप्त साक्ष्य मौजूद न हों।
‘राजनीतिक साजिश’ का आरोप:
फैसले के बाद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah ने मिलकर उनकी पार्टी को खत्म करने की साजिश रची। केजरीवाल ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को जेल भेजा गया, यहां तक कि एक सिटिंग मुख्यमंत्री को उनके घर से गिरफ्तार किया गया, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में अभूतपूर्व है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगभग छह महीने जेल में रहना पड़ा, जबकि मनीष सिसोदिया को करीब दो साल तक हिरासत में रखा गया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी:
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में कई खामियां पाई गईं। आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। सबसे पहले आबकारी विभाग के पूर्व आयुक्त कुलदीप सिंह को बरी किया गया, उसके बाद मनीष सिसोदिया और अंत में अरविंद केजरीवाल को राहत दी गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उनके समर्थन में मजबूत प्रमाण होना अनिवार्य है।

‘छवि खराब करने की कोशिश’:
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मीडिया के एक वर्ग ने लगातार उन्हें भ्रष्टाचार से जोड़कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, प्रदूषण और बुनियादी ढांचे की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
‘सत्य और संविधान की जीत’:
अपने संबोधन में केजरीवाल ने कहा कि यह सत्य की जीत है और अंततः संविधान की भावना विजयी हुई। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है। दिल्ली शराब नीति मामले में अदालत का यह फैसला राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकता है। एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे नैतिक और कानूनी जीत बता रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में इस पर नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस फैसले का आगामी चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
इन्हें मिली जमानत:
1) प्रिंस कुमार , 2) अर्जुन पांडे, 3) विजय नायर (A3), 4) बुच्चीबाबू गोरंतला, 5) चनप्रीत सिंह रयात, 6) अरविंद कुमार सिंह, 7) मूथा गौतम (A6), 8) मनीष सिसोदिया, 9) सरथ चंद्र रेड्डी , 10) दामोदर प्रसाद शर्मा, 11) अभिषेक बोइनपल्ली (A4), 12) राजेश जोशी, 13) नरेंद्र सिंह (A2), 14) अरविंद केजरीवाल, 15) समीर महेंद्रू (A7), 16) कुलदीप सिंह, 17) कविता कलवकुंतल @ के.कविता, 18) अरुण रामचंद्र पिल्लई (A5), 19) अमित अरोड़ा , 20) आशीष चंद माथुर, 21) विनोद चौहान, 22) दुर्गेश पाठक और 23) अमनदीप सिंह धल्ल को बरी किया कर दिया है।