रायपुर। छत्तीसगढ़ में चर्चित CSMCL ओवरटाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आबकारी विभाग के पूर्व विशेष सचिव एवं तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने 20 जुलाई 2026 तक पुलिस रिमांड मंजूर कर दी है।
2019 से 2024 के भुगतान की जांच में सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई EOW/ACB रायपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 44/2024 के तहत की गई है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के अलावा भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं भी लगाई गई हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच कर्मचारियों के ओवरटाइम, अतिरिक्त कार्य दिवस, बोनस और सर्विस चार्ज के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को 172 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया।
कमीशन के लिए अवैध भुगतान का आरोप
विवेचना में आरोप है कि इस भुगतान का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर नकद कमीशन के रूप में सिंडिकेट तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसियां इस पूरे वित्तीय लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
ED की कार्रवाई के बाद शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब 29 नवंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रायपुर इकाई ने तीन व्यक्तियों के पास से 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। इसके बाद संबंधित जानकारी राज्य शासन को भेजी गई, जिसके आधार पर EOW ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पहले ही दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
इस मामले में जांच एजेंसी पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर चुकी है। अब अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
रिमांड के दौरान होगी पूछताछ
EOW ने अरुणपति त्रिपाठी को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल की है। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और संभावित आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है।