भोपाल : केंद्र सरकार ने अल्कोहल युक्त दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। जिसके तहत अब लोगों को बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाई नहीं दी जाएगी। साथ ही मेडिकल स्टोर्स को भी अब इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड एक अलग रजिस्टर में रखना होगा। जिसको लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिशा निर्देश जारी कर दिए है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, अब 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी पैकिंग में उपलब्ध ओरल दवाओं को शेड्यूल H1 के दायरे में शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि ऐसी दवाएं अब बिना पंजीकृत डॉक्टर के पर्चे के नहीं बेची जा सकेंगी।
6 महीने बाद लागू होंगे नए नियम
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से कफ सिरप, टॉनिक और अन्य अल्कोहल आधारित दवाओं के गलत इस्तेमाल पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। साथ ही भारत में दवा नियमन को और मजबूत किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य पब्लिक हेल्थ सुरक्षा, मिसयूज रोकना और बेहतर ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करना है. नियम छह महीने बाद या नोटिफिकेशन के अनुसार लागू होंगे।
Schedule K की छूट भी खत्म
सरकार ने इस बदलाव के तहत 'Schedule K' में भी संशोधन किया है. इसके तहत पहले जिन दवाओं को नियमों और बिक्री में कुछ विशेष छूट मिलती थी, वह छूट अब 30 ml से बड़ी और 12% से ज्यादा अल्कोहल वाली ओरल दवाओं पर लागू नहीं होगी। बता दें कि Schedule H1 लिस्ट में नींद की गोलियां, हैवी पेनकिलर्स और नशे के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली बेहद संवेदनशील दवाएं शामिल है। जिनके ज्यादा सेवन से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।