पूर्व आईपीएल चेयरमैन और क्रिकेट प्रशासक ललित मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी और पीएम मोदी की बातचीत मुख्य रूप से क्रिकेट और खेल बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित रहती थी। लंदन में दिए एक इंटरव्यू में ललित मोदी ने बताया कि नरेंद्र मोदी हमेशा गुजरात में क्रिकेट को आगे बढ़ाने और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने में विशेष रुचि रखते थे।
'नरेंद्र मोदी क्रिकेट के प्रति बेहद जुनूनी थे'
ललित मोदी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रिकेट के बड़े प्रशंसक रहे हैं और अहमदाबाद में क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए लगातार रुचि दिखाते थे। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच जो भी संपर्क और नजदीकी थी, वह केवल क्रिकेट प्रशासन और खेल विकास से जुड़ी थी, न कि किसी राजनीतिक विषय से।
नरेंद्र मोदी स्टेडियम पर बयान के बाद बढ़ी थी चर्चा
हाल ही में ललित मोदी का एक बयान काफी सुर्खियों में रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि मौका मिले तो वह अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को दोबारा डिजाइन और विकसित करना चाहेंगे। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और खेल जगत में बहस छिड़ गई थी, क्योंकि यह स्टेडियम दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियमों में गिना जाता है।
'मेरा मकसद आलोचना नहीं, बेहतर विजन पेश करना था'
अपने बयान पर सफाई देते हुए ललित मोदी ने कहा कि उन्होंने कभी भी नरेंद्र मोदी स्टेडियम की आलोचना नहीं की। उनके मुताबिक यह वर्तमान में भारत का सबसे बेहतरीन क्रिकेट स्टेडियम है, लेकिन वैश्विक स्तर पर दर्शकों को और बेहतर अनुभव देने के लिए भविष्य में और आधुनिक सुविधाओं की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भारतीय खेल ढांचे के लिए बड़े और दीर्घकालिक विजन की बात करना था।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के स्टेडियम बनाने की वकालत
ललित मोदी का मानना है कि आज भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) आर्थिक रूप से बेहद मजबूत स्थिति में है और उसके पास विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने वेम्बली, लॉर्ड्स, कैंप नो, ओल्ड ट्रैफर्ड और एतिहाद जैसे प्रसिद्ध स्टेडियमों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को भी ऐसे खेल परिसर विकसित करने चाहिए जो वैश्विक स्तर पर नई मिसाल कायम कर सकें।
BCCI की आर्थिक ताकत का उठाना चाहिए लाभ
उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट की लोकप्रियता और BCCI की वित्तीय मजबूती को देखते हुए अब समय आ गया है कि देश में ऐसे स्टेडियम बनाए जाएं जो केवल मैच आयोजन तक सीमित न हों, बल्कि दर्शकों को विश्वस्तरीय अनुभव भी प्रदान करें। ललित मोदी के मुताबिक भारत के पास संसाधनों की कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ बड़े लक्ष्य और दूरदर्शी सोच की है।