खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। हरिभूमि-आईएनएच के ‘जिला संवाद’ कार्यक्रम में खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकास, स्थानीय समस्याओं, राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की संभावनाओं पर जनप्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित संवाद में कांग्रेस और भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और सरकार की योजनाओं को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। कार्यक्रम में गंडई नगर पंचायत अध्यक्ष टाकेश्वर शाह खुसरो, गिरिराज किशोर दास, राशि त्रिपाठी और घमन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संवाद के दौरान राजनीतिक मतभेदों के साथ-साथ विकास के मुद्दों पर भी तीखी और दिलचस्प बातचीत देखने को मिली।
सवाल: विपरीत परिस्थितियों में चुनाव जीतने के बाद गंडई नगर पंचायत चलाना कितना चुनौतीपूर्ण है?
जवाब- टाकेश्वर शाह खुसरो: उन्होंने कहा कि सत्ता और सरकार के खिलाफ रहकर चुनाव जीतना आसान नहीं था। जनता ने जो जनादेश दिया है, उस पर खरा उतरने की जिम्मेदारी है। नगर पंचायत में कांग्रेस के छह पार्षद हैं, जबकि भाजपा के नौ पार्षद हैं। इसके बावजूद विकास से जुड़े प्रस्ताव बहुमत से पारित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास दोनों दलों के पार्षदों के साथ समन्वय बनाकर गंडई के विकास के लिए काम करना है। चुनाव के दौरान राजनीतिक दल अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं।
सवाल: भाजपा के नौ पार्षद आपके प्रस्तावों का समर्थन क्यों करते हैं? क्या आपने भाजपा को ‘सेट’ कर लिया है?
जवाब- टाकेश्वर शाह खुसरो: इस सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब भाजपा के पार्षद ही बेहतर दे सकते हैं। उनका कहना था कि यदि उनका कोई प्रस्ताव गलत होता तो भाजपा के पार्षद उसका विरोध करते। लेकिन विकास से जुड़े कार्यों में पार्षद उनका साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी छवि साफ है और वे बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के गंडई के विकास के लिए काम करना चाहते हैं।
सवाल: गंडई के विकास में सबसे बड़ी जरूरत क्या है?
जवाब- टाकेश्वर शाह खुसरो: उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना था कि गंडई को जिला बनाए जाने के बाद यहां बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद थी। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की कमी अभी भी समस्या बनी हुई है।
उन्होंने रेडियोलॉजिस्ट, गाइनेकोलॉजिस्ट और मेडिसिन विशेषज्ञों की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि अस्पताल का जरूरी सेटअप पूरी तरह मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पूर्ववर्ती सरकार सत्ता में होती तो जिला अस्पताल की मांग को लेकर किए गए प्रयासों को और आगे बढ़ाया जा सकता था।
सवाल: महतारी वंदन योजना को लेकर आपकी क्या राय है?
जवाब- टाकेश्वर शाह खुसरो: उन्होंने सरकार की मुफ्त योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी योजनाओं की समीक्षा की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि बड़ी राशि सीधे योजनाओं में खर्च होने के बजाय विकास कार्यों में लगाई जाए तो क्षेत्र का बुनियादी विकास बेहतर तरीके से हो सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि यदि महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना जारी रहती है तो पुरुषों के लिए भी इसी तरह की योजना शुरू की जानी चाहिए।
सवाल: क्या महतारी वंदन योजना बंद होनी चाहिए?
जवाब- राशि त्रिपाठी: इस मुद्दे पर उन्होंने महतारी वंदन योजना बंद किए जाने का विरोध किया। उनका कहना था कि योजना से महिलाओं को आर्थिक मदद मिल रही है और कई परिवारों में महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, ट्यूशन फीस और अपनी जरूरतों के लिए कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि कई महिलाएं इस राशि को बचाकर आपातकालीन जरूरतों के लिए रखती हैं, जबकि कुछ महिलाएं इससे छोटे स्तर पर रोजगार के साधन भी विकसित कर रही हैं। उनके मुताबिक महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ऐसी योजनाओं को जारी रखना जरूरी है।
सवाल: अगर महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना है तो पुरुषों के लिए भी ऐसी योजना होनी चाहिए?
जवाब- राशि त्रिपाठी: उन्होंने कहा कि यदि जरूरत महसूस होती है तो पुरुषों के लिए भी ऐसी योजना पर विचार किया जा सकता है। उनका कहना था कि किसी भी वर्ग की वास्तविक जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरकार योजनाएं बना सकती है।
सवाल: खैरागढ़ क्षेत्र की सबसे बड़ी स्थानीय समस्या क्या है?
जवाब- गिरिराज किशोर दास: उन्होंने क्षेत्र में खराब सड़क व्यवस्था को बड़ी समस्या बताया। उनका कहना था कि आम लोगों, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर बिजली बिल का भी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई परिवारों के लिए बिजली का एक बड़ा बिल पूरे साल मिलने वाली महतारी वंदन राशि के बराबर या उससे अधिक हो जाता है। ऐसे में सरकार को आम लोगों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सवाल: धान खरीदी से जुड़ी नई व्यवस्था को लेकर क्या समस्या है?
जवाब- गिरिराज किशोर दास: उन्होंने धान खरीदी के दौरान दस्तावेजों और परिवार के सदस्यों से जुड़े नियमों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि जमीन के पट्टे में किसी बहन का नाम दर्ज है और उसकी शादी कई वर्ष पहले हो चुकी है, तो उसके हस्ताक्षर या अन्य दस्तावेज की व्यवस्था ग्रामीण परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी परिस्थितियां पारिवारिक विवाद को बढ़ा सकती हैं।
सवाल: क्या मौजूदा सरकार के पास विकास का स्पष्ट रोडमैप है?
जवाब- कार्यक्रम में कांग्रेस पक्ष की ओर से कहा गया कि सरकार को विकास के लिए स्पष्ट योजना और पर्याप्त फंड उपलब्ध कराने की जरूरत है। दावा किया गया कि कई पंचायतों में मूलभूत विकास कार्यों के लिए फंड की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि पंचायत स्तर पर सड़क, पानी, नाली और अन्य बुनियादी कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने से स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने परेशानी खड़ी हो रही है। कुछ पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा सामूहिक इस्तीफे दिए जाने का भी उल्लेख किया गया।
सवाल: राजनीतिक भविष्य को लेकर दोनों दलों की क्या स्थिति है?
जवाब: संवाद के दौरान यह बात सामने आई कि कांग्रेस और भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधि अपने-अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर आशावादी हैं। कांग्रेस पक्ष के नेताओं ने आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई, जबकि भाजपा से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपने राजनीतिक आधार को मजबूत बताया। कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि स्थानीय चुनावों में किसी उम्मीदवार की जीत सिर्फ पार्टी के आधार पर तय नहीं होती। व्यक्ति की छवि, परिवार की पृष्ठभूमि, स्थानीय संपर्क और वर्षों के राजनीतिक काम का भी प्रभाव पड़ता है।
जनता का विकास सबसे बड़ा मुद्दा
‘जिला संवाद’ में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ यह सवाल भी प्रमुखता से उठा कि आखिर आम जनता के जीवन में कितना बदलाव आया है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक सफलता से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के विकास और स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का यह सिलसिला आगे भी जारी रखने की बात कही गई।