CG News: वस्तु एवं सेवाकर विभाग की खुफिया इकाई (DGGI) ने 12.50 करोड़ रुपये की कथित GST चोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी अभिषेक पाठक के घर पर छापेमारी की। जांच के लिए रायपुर से पहुंची टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की और करीब आठ घंटे तक पूछताछ करने के बाद आरोपी को अपने साथ ले गई।
गांव स्थित घर पर पहुंची जांच टीम
सोमवार को DGGI अधिकारियों की टीम जलालाबाद क्षेत्र के अतिवरा गांव पहुंची, जहां अभिषेक पाठक अपने परिवार के साथ रह रहे थे। अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच की। कार्रवाई के दौरान आसपास के क्षेत्र में भी चर्चा का माहौल बना रहा।
फर्जी कंपनियों के जरिए GST चोरी का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, अभिषेक पाठक और रायपुर निवासी अमन सिंह पर फर्जी कंपनियों के माध्यम से GST चोरी करने का आरोप है। आरोप है कि दोनों ने कथित रूप से फर्जी बिलिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के जरिए करोड़ों रुपये के कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया।
पूछताछ में सामने आया अभिषेक का नाम
मामले की प्रारंभिक जांच के दौरान अमन सिंह का नाम सामने आया था। जांच एजेंसियों ने उसे मार्च महीने में गिरफ्तार किया था। अधिकारियों का कहना है कि अमन सिंह से पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अभिषेक पाठक की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
नोटिस के बाद भी नहीं हुए उपस्थित
सूत्रों के अनुसार, DGGI ने अभिषेक पाठक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होने के बाद अधिकारियों ने सीधे उनके निवास पर पहुंचकर कार्रवाई की। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले गए।
आठ घंटे तक चली जांच
सुबह शुरू हुई जांच देर शाम तक जारी रही। करीब आठ घंटे की लंबी पूछताछ के बाद अधिकारी अभिषेक पाठक को आगे की कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर रवाना हो गए।
DGGI आयुक्त ने क्या कहा?
DGGI रायपुर के आयुक्त सुजीत मलिक ने बताया कि 12.50 करोड़ रुपये की GST चोरी से जुड़े मामले में पहले ही एक आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है। उसी जांच के क्रम में यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने पुष्टि की कि इस मामले में अभिषेक पाठक के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
जांच जारी, सामने आ सकते हैं नए खुलासे
कर चोरी के इस बड़े मामले में DGGI लगातार वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल एजेंसी पूरे नेटवर्क और कथित फर्जी कंपनियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।