नारायणपुर। कभी नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले अबूझमाड़ में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। जिन इलाकों तक पहुंचना कभी बेहद कठिन माना जाता था, वहां अब सुरक्षा बल और स्थानीय ग्रामीण मिलकर आधारभूत सुविधाओं का निर्माण कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 38वीं वाहिनी ने जाटलूर नाला पर 250 फीट लंबा लकड़ी का सस्पेंशन ब्रिज तैयार किया है, जिससे बारिश के दौरान कट जाने वाले कई गांवों को बड़ी राहत मिलेगी।
स्थानीय सहयोग से तैयार हुआ सस्पेंशन ब्रिज
करीब 250 फीट लंबा, 5 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊंचा यह फुट सस्पेंशन ब्रिज स्थानीय संसाधनों, ITBP के जवानों और ग्रामीणों के सामूहिक श्रमदान से बनाया गया है। पुल का उद्घाटन केंद्रीय सीमांत मुख्यालय के महानिरीक्षक अजय पाल सिंह ने किया। अधिकारियों ने इसे सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच बढ़ते भरोसे और सहभागिता का प्रतीक बताया।
नक्सल मुक्त होने के बाद तेज हुए विकास कार्य
31 मार्च 2026 को नारायणपुर जिले को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिली है। वर्षों तक नक्सली गतिविधियों के कारण जहां सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकी थीं, वहां अब कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर तेजी से काम किया जा रहा है।
बारिश में नहीं कटेगा गांवों का संपर्क
हर वर्ष मानसून के दौरान जाटलूर नाला उफान पर आने से जाटलूर, धोबे, हरवेल, डोडीमार्का, पदमेटा, बोटेर, कुमनार और दीवालूर सहित कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। ग्रामीणों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
नए पुल के निर्माण से अब बारिश के मौसम में भी लोगों का आवागमन सुरक्षित और सुचारु बना रहेगा। ओरछा के साप्ताहिक बाजार तक पहुंच आसान होगी, वहीं राशन, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित नहीं होगी।
मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ी राहत
बरसात के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को होती थी। कई बार समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से स्थिति गंभीर हो जाती थी। नए पुल के बनने से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।
शहीद जवान के नाम पर होगा पुल
उद्घाटन समारोह में आईजी अजय पाल सिंह ने घोषणा की कि इस पुल का नाम नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए अमोल माधव राव के नाम पर रखा जाएगा। यह पुल उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहेगा।
बदलते अबूझमाड़ की नई पहचान
जाटलूर नाला पर बना यह सस्पेंशन ब्रिज केवल दो किनारों को जोड़ने वाला ढांचा नहीं, बल्कि अबूझमाड़ में शांति, विकास और जनसहभागिता की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है। यह परियोजना दर्शाती है कि सुरक्षा बल अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।