नई दिल्ली। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन साबित हुआ जब हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace ने देश का पहला पूर्णतः निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च किया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर 12:05 बजे इस रॉकेट ने उड़ान भरी। इस मिशन को "मिशन आगमन" नाम दिया गया था।
हालांकि खराब मौसम और अंतिम समय में सामने आई कुछ तकनीकी व नेविगेशन संबंधी चुनौतियों के कारण लॉन्च निर्धारित समय से लगभग 35 मिनट की देरी से किया गया।
450 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थापित होंगे पेलोड
मिशन के तहत विक्रम-1 लगभग 16 मिनट की उड़ान के बाद अपने साथ ले जाए गए विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पेलोड को पृथ्वी से करीब 450 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करेगा। यह वही कक्षा है जहां कई संचार, मौसम और वैज्ञानिक उपग्रह संचालित होते हैं।
कार्बन-कंपोजिट तकनीक से तैयार रॉकेट
विक्रम-1 की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर है। इस हल्के लेकिन मजबूत ढांचे की वजह से रॉकेट का कुल वजन कम हुआ है, जिससे ईंधन की दक्षता बढ़ी और पेलोड क्षमता में भी सुधार हुआ है। इसे भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट माना जा रहा है, जिसमें इस तरह की उन्नत संरचनात्मक तकनीक का उपयोग किया गया है।
चार चरणों में करता है काम
रॉकेट को तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल (LOAM) से संचालित किया जाता है। शुरुआती तीन चरण रॉकेट को अंतरिक्ष तक पहुंचाने का काम करते हैं, जबकि अंतिम लिक्विड मॉड्यूल पेलोड को उसकी निर्धारित कक्षा में सटीक रूप से स्थापित करता है।
कई तकनीकी पेलोड लेकर रवाना हुआ मिशन
विक्रम-1 अपने साथ कई तकनीकी और अनुसंधान पेलोड लेकर गया है। इनमें ग्रह स्पेस, कॉस्मोसर्व स्पेस, डीक्यूब्ड और स्काईरूट एयरोस्पेस का अपना स्कोप (SCOPE) पेलोड शामिल है। इन पेलोड के जरिए विभिन्न अंतरिक्ष तकनीकों और प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा।
भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए मील का पत्थर
विशेषज्ञों के अनुसार, विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे भविष्य में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने, छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण और वैश्विक लॉन्च बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।