भिलाई नगर विधानसभा चुनाव से जुड़े कानूनी विवाद में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अब यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियमित ट्रायल के रूप में आगे बढ़ेगा, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें प्रस्तुत करेंगे।
क्या है पूरा चुनावी विवाद?
यह मामला भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली निर्वाचन याचिका से जुड़ा है। प्रेम प्रकाश पांडेय ने निर्वाचन याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन पत्र के साथ दाखिल शपथ-पत्र में आवश्यक जानकारी का पूर्ण खुलासा नहीं किया गया। साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन और कथित भ्रष्ट आचरण से जुड़े आरोप भी याचिका में शामिल किए गए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पहुंची थी SLP
मामले की सुनवाई के दौरान देवेंद्र यादव ने हाईकोर्ट से कुछ बिंदुओं को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करने का अनुरोध किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन स्वीकार नहीं किया कि संबंधित प्रश्न तथ्य और कानून दोनों से जुड़े हैं तथा उनका निर्णय साक्ष्यों के आधार पर नियमित सुनवाई के दौरान ही किया जाना उचित होगा। इसी आदेश को चुनौती देते हुए देवेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
पहले भी नहीं मिली थी राहत
यह पहली बार नहीं है जब इस चुनावी विवाद में देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। इससे पहले भी एक अन्य याचिका में उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसे फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान देवेंद्र यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पैरवी की। वहीं प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने अपना पक्ष रखा।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब पूरा मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियमित ट्रायल के रूप में आगे बढ़ेगा। अदालत द्वारा तय किए गए मुद्दों पर दोनों पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे और उसके बाद मामले का अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।