भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए करीब 5,000 अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार 25 अगस्त से पात्र अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों की ऑनलाइन जॉइनिंग 1 सितंबर से शुरू की जाएगी। पूरी प्रक्रिया गेस्ट फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम (GFMS) के माध्यम से ऑनलाइन संचालित होगी।
मेरिट के आधार पर होगा चयन
विभाग के अनुसार अतिथि शिक्षकों का चयन विकासखंड और जिला स्तर पर तैयार मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। संबंधित स्कूल में रिक्त पद होने पर स्कूल प्रभारी GFMS पोर्टल के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को आमंत्रित करेंगे। यदि किसी उम्मीदवार ने पिछले शैक्षणिक सत्र में उसी विद्यालय में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य किया है और पद रिक्त है, तो उसे प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान रखा गया है। इसके बाद मेरिट सूची के अनुसार अन्य पात्र अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।
आवेदन और जॉइनिंग पूरी तरह ऑनलाइन
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया का प्रत्येक चरण ऑनलाइन होगा। उम्मीदवार की सहमति, दस्तावेज सत्यापन और जॉइनिंग की जानकारी GFMS पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को जॉइनिंग मिलने के दिन ही पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी।
विकासखंड में उम्मीदवार नहीं मिलने पर जिला पैनल से चयन
यदि किसी विषय में विकासखंड स्तर पर पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं, तो संबंधित स्कूल जिला स्तरीय मेरिट सूची से अभ्यर्थियों का चयन कर सकेंगे। चयन से पहले उम्मीदवारों के दस्तावेजों और स्कोर कार्ड का सत्यापन किया जाएगा। किसी भी प्रकार की जानकारी गलत पाए जाने पर उम्मीदवार की पात्रता समाप्त की जा सकती है।
ऑफलाइन आवेदन या नियुक्ति नहीं होगी
विभाग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से ही संचालित की जाए। किसी भी परिस्थिति में ऑफलाइन आवेदन, बुलावा या नियुक्ति मान्य नहीं होगी। साथ ही ई-अटेंडेंस और दस्तावेज सत्यापन के नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा।
प्राथमिक शिक्षक पदों के लिए विशेष व्यवस्था
यदि वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक के रिक्त पदों के लिए विकासखंड और जिला स्तर पर कोई पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होता है, तो ऐसे मामलों में वर्ग-3 जनरल पैनल से योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाना है।