दुर्ग। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पंडवानी की अप्रतिम कलाकार और पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। भावुक माहौल के बीच उनके पुत्र दिल्हरण पारधी ने श्मशान घाट पर मां को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, कलाकार, ग्रामीण और आम नागरिक मौजूद रहे।
बारिश के बीच उमड़ा जनसैलाब
अंतिम संस्कार से पहले आयोजित श्रद्धांजलि सभा में तेज बारिश भी लोगों के कदम नहीं रोक सकी। गांव और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों लोगों ने अपनी प्रिय लोक कलाकार को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अनूठी पंडवानी शैली से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देश ही नहीं, दुनिया भर में नई पहचान दिलाई।
सरकार ने किया बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे मंत्री गजेंद्र यादव ने श्रद्धांजलि सभा के दौरान महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि गनियारी स्थित हाई स्कूल और प्राथमिक विद्यालय का नाम अब पद्म विभूषण तीजन बाई के नाम पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को उनकी कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास है।
लोक कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति
तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है। अंतिम दर्शन के लिए दूर-दराज से लोग गनियारी पहुंचे और नम आंखों से अपनी प्रिय लोक कलाकार को अंतिम प्रणाम किया। कई सांस्कृतिक संस्थाओं और कलाकारों ने उनके निधन को लोक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
मुख्यमंत्री सहित कई हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम संस्कार से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर पहुंचकर तीजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उनके साथ विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी। सभी ने तीजन बाई के सांस्कृतिक योगदान को अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी पंडवानी शैली, लोक संस्कृति के प्रति समर्पण और कला की विरासत सदैव जीवित रहेगी। गनियारी के स्कूलों का नाम उनके नाम पर रखने का निर्णय उनके योगदान को स्थायी सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
