सूरजपुर || नौशाद अहमद: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में मंगलवार को TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक सड़क पर उतरे और स्थानीय रंगमंच से संयुक्त जिला कार्यालय तक रैली निकाली। इस दौरान शिक्षकों ने जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री तथा स्कूल शिक्षा मंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
शिक्षकों के आंदोलन के चलते जिले में प्रशासनिक गतिविधियां तेज रहीं। वहीं, कई स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की बात भी सामने आई। इससे बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावकों में चिंता देखने को मिली।
TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के फैसले के बाद सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य किया गया है। इसी निर्णय के विरोध में शिक्षक संगठित होकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग के साथ अपनी अन्य मांगों को भी सरकार के सामने रखा। उनका कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं और मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
रैली के बाद शिक्षकों ने संयुक्त जिला कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें TET की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने समेत पांच सूत्रीय मांगें शामिल हैं। शिक्षकों ने सरकार से उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है।
शिक्षकों की गैरमौजूदगी से स्कूलों में असर
शिक्षकों के आंदोलन का असर जिले के कई स्कूलों की व्यवस्था पर भी देखने को मिला। प्रदर्शन में शामिल होने के कारण कुछ स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति प्रभावित रही, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई। स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति को लेकर अभिभावकों में भी चिंता नजर आई। पालकों का कहना है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
'मांगों की अनदेखी से सड़क पर उतरने को मजबूर'
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। शिक्षक प्रतिनिधि सचिन त्रिपाठी और प्रदर्शनकारी शिक्षिका ने भी आंदोलन और अपनी मांगों को लेकर अपनी बात रखी।