सुकमा : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न कई गांवों के लिए बेहद खास रहा। जिले के करीब 50 दूरस्थ गांवों में पहली बार ग्रामीणों ने अपने गांव में तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया। कभी नक्सली गतिविधियों के प्रभाव वाले इन इलाकों में ग्रामीणों ने एकजुट होकर राष्ट्रगान गाया और राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी।
चिंतागुफा, चिंतलनार, जगरगुंडा, किस्टाराम और कोंटा समेत विभिन्न थाना क्षेत्रों के गांवों में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित किए गए। ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने इलाके में बदलते माहौल की तस्वीर सामने रखी।
नक्सल प्रभाव वाले इलाकों में पहली बार दिखा ऐसा उत्साह
सुकमा के जिन गांवों में कभी नक्सली हिंसा के चलते राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन करना मुश्किल होता था, वहां अब ग्रामीण खुले तौर पर स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। गांवों में तिरंगा फहराने के साथ बच्चों और ग्रामीणों ने राष्ट्रगान में हिस्सा लिया। यह बदलाव क्षेत्र में नक्सली प्रभाव कम होने और प्रशासन की पहुंच बढ़ने के साथ ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास से जोड़कर देखा जा रहा है।
तिरंगे के नीचे जुटे ग्रामीण
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अलग-अलग गांवों में ग्रामीण एकत्र हुए। लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देशभक्ति के नारों के साथ आजादी का पर्व मनाया। कई जगहों पर बच्चों ने भी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कभी भय के माहौल के लिए पहचाने जाने वाले इन इलाकों में तिरंगे के नीचे ग्रामीणों का जुटना स्थानीय स्तर पर बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था के साथ विकास पर भी जोर
सुकमा में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के साथ ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और प्रशासन तक उनकी पहुंच बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। पुलिस की ओर से ग्रामीणों के साथ लगातार संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं को समझने पर जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा के बेहतर माहौल से ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा है और अब वे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में पहले की तुलना में अधिक सक्रियता से शामिल हो रहे हैं।
बस्तर में बदलते माहौल की तस्वीर
सुकमा के इन गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाना केवल स्वतंत्रता दिवस समारोह तक सीमित नहीं है। यह बस्तर के उन इलाकों में बदलती परिस्थितियों की तस्वीर भी पेश करता है, जहां लंबे समय तक नक्सली हिंसा का असर रहा है।
अब उन्हीं इलाकों में राष्ट्रगान की आवाज सुनाई दे रही है और ग्रामीण राष्ट्रीय पर्व को उत्साह के साथ मना रहे हैं। इससे प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बढ़ते संवाद तथा मुख्यधारा से जुड़ाव की तस्वीर सामने आती है।
SP मयंक गुर्जर ने बताया ऐतिहासिक अवसर
सुकमा के पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने स्वतंत्रता दिवस के इन आयोजनों को जिले के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्ति के बाद यह स्वतंत्रता दिवस सुकमा के लिए ऐतिहासिक है।
उन्होंने बताया कि करीब 40 से 50 गांवों में स्वतंत्रता दिवस समारोह होना बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत है। पुलिस का प्रयास है कि इन आयोजनों के जरिए ग्रामीणों को शासन से जोड़ा जाए और उनकी समस्याओं को समझकर समाधान की दिशा में काम किया जाए। SP ने कहा कि ग्रामीण अब प्रशासन के साथ संवाद कर रहे हैं, अपनी समस्याएं सामने रख रहे हैं और राष्ट्रीय पर्वों में उत्साह से भाग ले रहे हैं।
भय की जगह विश्वास, बंदूक की जगह तिरंगा
सुकमा के इन गांवों की तस्वीर में सबसे बड़ा बदलाव यही दिखाई देता है कि कभी जहां हिंसा और भय का असर था, वहां अब तिरंगा शान से लहरा रहा है। ग्रामीणों की भागीदारी और बच्चों द्वारा राष्ट्रगान गाया जाना क्षेत्र में बदलते सामाजिक माहौल की ओर इशारा करता है। स्वतंत्रता दिवस पर करीब 50 गांवों में पहली बार फहराया गया तिरंगा सुकमा के लिए शांति, विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था से मजबूत जुड़ाव की नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।