नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव ने चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया। यह मामला साल 2010 में फिल्म ‘अता पता लापता’ की फंडिंग से जुड़ा है, जिसमें लिए गए लोन की रकम समय पर न चुकाने का आरोप है। कोर्ट ने बार-बार राहत देने से इनकार करते हुए आत्मसमर्पण का निर्देश दिया था।
सरेंडर से पहले भावुक दिखे अभिनेता:
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तिहाड़ जेल पहुंचने से पहले राजपाल यादव भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “क्या करूं सर? मेरे पास पैसे नहीं हैं। कोई रास्ता नहीं दिखता। यहां हम सब अकेले हैं, कोई दोस्त नहीं है। मुझे इस मुश्किल से अकेले ही निपटना होगा।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।
2010 की फिल्म फंडिंग से जुड़ा विवाद:
बताया जाता है कि राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके बाद वे पूरी रकम वापस नहीं कर सके। कंपनी का आरोप है कि भुगतान के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके चलते अभिनेता और उनकी पत्नी के खिलाफ निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दर्ज किया गया।
निचली अदालत ने सुनाई थी सजा
2018 में ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में हाई कोर्ट ने अपील पर राहत देते हुए सजा पर रोक लगाई, लेकिन शर्त रखी कि बकाया रकम चुकानी होगी।
आंशिक भुगतान के बावजूद बढ़ता गया कर्ज:
राजपाल यादव ने समय-समय पर कुछ राशि लौटाई, जिसमें हाल ही में करीब 75 लाख रुपये का भुगतान भी शामिल है। इसके बावजूद पूरा कर्ज नहीं चुक सका और ब्याज समेत देनदारी बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
हाई कोर्ट का सख्त रुख, राहत से इनकार:
फरवरी 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी अंतिम याचिका खारिज करते हुए कहा कि अभिनेता का रवैया गंभीर नहीं है और अदालत के भरोसे को ठेस पहुंची है। इसके बाद उन्हें आत्मसमर्पण का आदेश दिया गया, जिसके तहत उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया।