नई दिल्ली। रेलवे यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रेल मंत्रालय ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और टिकट जांच स्टाफ (TTE) के अधिकारों का विस्तार कर दिया है। जन विश्वास अधिनियम के तहत लागू नए नियमों के अनुसार अब कई प्रकार के रेलवे नियमों के उल्लंघन पर लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय मौके पर ही जुर्माना लगाया जा सकेगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अनुशासन बनाए रखना, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और छोटे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का बोझ कम करना है।
RPF इंस्पेक्टर को मिले नए अधिकार
संशोधित नियमों के तहत सहायक उपनिरीक्षक (ASI) से ऊपर के RPF अधिकारी अब रेलवे परिसर में कई मामलों में सीधे जुर्माना लगाने के लिए अधिकृत होंगे। पहले RPF केवल मामला दर्ज कर आरोपी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करती थी, लेकिन अब कई मामलों का मौके पर ही निपटारा किया जा सकेगा।
विशेष परिस्थितियों में RPF इंस्पेक्टर संदिग्ध यात्रियों के टिकट की जांच भी कर सकेंगे। हालांकि नियमित टिकट जांच का अधिकार पहले की तरह TTE के पास ही रहेगा।
TTE के अधिकार भी बढ़ाए गए
रेल मंत्रालय ने टिकट जांच स्टाफ (TTE) को भी अतिरिक्त अधिकार दिए हैं। अब वे केवल टिकट जांच ही नहीं करेंगे, बल्कि रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी तत्काल जुर्माना लगा सकेंगे।
इसमें अवैध वेंडिंग, धूम्रपान और गंदगी फैलाने जैसे मामलों पर कार्रवाई शामिल होगी।
किन मामलों में लगेगा जुर्माना?
नए नियमों के तहत निम्न उल्लंघनों पर कार्रवाई की जाएगी—
₹500 – रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश या रेलवे लाइन पार करने पर
₹2,000 – स्टेशन या ट्रेन में अवैध वेंडिंग करने पर
₹2,000 – दिव्यांग या पेंट्रीकार कोच में अनधिकृत यात्रा करने पर
₹2,500 – महिला कोच में नियमों के विरुद्ध यात्रा करने पर
₹2,000 – स्टेशन परिसर में धूम्रपान करने पर
₹1,000 – रेलवे स्टेशन पर गंदगी फैलाने पर
₹500 – अवैध पार्किंग करने पर
₹10,000 – प्रतिबंधित या खतरनाक वस्तुएं लेकर यात्रा करने पर
न्यूनतम जुर्माना भी बढ़ाया गया
रेल मंत्रालय ने रेलवे नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले न्यूनतम जुर्माने को ₹250 से बढ़ाकर ₹500 कर दिया है। सरकार का मानना है कि इससे नियमों का पालन बेहतर तरीके से सुनिश्चित होगा और रेलवे परिसरों में स्वच्छता व सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद छोटे मामलों में यात्रियों को अदालत या लंबी कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे अवैध वेंडिंग, गंदगी, धूम्रपान और अनधिकृत प्रवेश जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।