रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे डुमरतालाब गांव में रेलवे की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर रायपुर को आवेदन सौंपकर रेलवे की बताई जा रही भूमि के बंटांकन, नामांतरण, रजिस्ट्री और कथित बिक्री की निष्पक्ष जांच कराने तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
राजस्व रिकॉर्ड में रेलवे सड़क के रूप में दर्ज होने का दावा
शिकायतकर्ता बलबीर सिंह ने अपने आवेदन में दावा किया है कि खसरा क्रमांक 43/2 पूर्व के राजस्व अभिलेखों में रेलवे मार्ग (रेलवे सड़क) से जुड़ी भूमि का हिस्सा रहा है। उनका कहना है कि वर्ष 1955 के बाद से उपलब्ध रिकॉर्ड और वर्ष 1977 के दस्तावेजों में यह भूमि खसरा क्रमांक 30/4 के अंतर्गत रेलवे सड़क के रूप में दर्ज रही है। वर्तमान बी-1 रिकॉर्ड में भी इसका उल्लेख रेलवे सड़क भूमि के रूप में होने का दावा किया गया है।
बंटांकन और नामांतरण पर उठाए सवाल
शिकायत के अनुसार वर्ष 2000-01 में खसरा क्रमांक 43/1 से अलग कर 43/2 का नया बंटांकन किया गया। इसके बाद कथित रूप से इस भूमि का नामांतरण और रजिस्ट्री भी कर दी गई। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि भूमि रेलवे की थी, तो निजी स्वामित्व में परिवर्तन किस नियम और किस सक्षम अधिकारी की अनुमति से किया गया।
कथित कब्जे और बिक्री का भी आरोप
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि पर कथित रूप से कब्जा, खुदाई और विक्रय की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। शिकायत में कुछ व्यक्तियों और एक निजी संस्था का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी अभी सामने नहीं आई है।
इन बिंदुओं पर जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि—
वर्ष 1955 से अब तक के सभी राजस्व अभिलेख, नक्शे, बी-1, खसरा और नामांतरण रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।
वर्ष 2000-01 में किए गए बंटांकन और उसके वैधानिक आधार की जांच हो।
नामांतरण और रजिस्ट्री की प्रक्रिया की समीक्षा कर अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
कथित कब्जे, खुदाई और बिक्री की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
यदि भूमि रेलवे की पाई जाती है तो अवैध प्रविष्टियों को निरस्त कर उसे पुनः शासकीय अभिलेख में दर्ज किया जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामला सार्वजनिक उपयोग की भूमि और रेलवे संपत्ति से जुड़ा होने के कारण गंभीर है। फिलहाल शिकायत कलेक्टर कार्यालय को सौंप दी गई है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।