Mohan Cabinet Decision: मध्य प्रदेश में आज हुई कैबिनेट बैठक के बाद प्रदेशवासियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पट्टाधारियों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है।
कैबिनेट में हुए इस बड़े फैसले की जानकारी देते हुए प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि अब राज्य में स्वामित्व योजना के अंतर्गत आने वाले सभी पट्टाधारियों को सरकार पूरी तरह से प्रमाणित और रजिस्टर्ड दस्तावेज सौंपने जा रही है। सरकार के इस कदम से प्रदेश के संपत्ति धारकों को अपनी जमीन का मालिकाना हक कानूनी रूप से बेहद मजबूत स्थिति में मिल सकेगा।
बैंकों से लोन मिलना होगा आसान
कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने इस फैसले के दूरगामी आर्थिक फायदों के बारे में बताते हुए कहा कि अब तक पट्टा होने के बावजूद कई लोगों को वित्तीय कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। संपत्तियों के आधिकारिक तौर पर रजिस्टर्ड दस्तावेज हाथ में आने के बाद, आम नागरिकों और गरीब परिवारों के लिए बैंकों से लोन लेना आसान हो जाएगा। इस निर्णय के बाद पट्टाधारी अपनी संपत्ति पर बिना किसी कानूनी अड़चन के लोन लेकर अपने व्यवसाय या घर के काम को आगे बढ़ा सकेंगे।
प्रदेश के 48 लाख परिवारों को फायदा
राज्य सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश के करीब 48 लाख पट्टाधारियों को सीधा और तत्काल लाभ मिलने जा रहा है। यह प्रदेश के एक बड़े हिस्से को सीधे तौर पर लाभांवित करने वाली योजना है। पट्टाधारियों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के यह रजिस्टर्ड दस्तावेज उपलब्ध कराने का पूरा जिम्मा सरकार ने अपने ऊपर लिया है। इस पूरी पंजीकरण प्रक्रिया और दस्तावेजों को तैयार करने के लिए राज्य सरकार अपने खजाने से 3800 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने जा रही है।