छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार को शुरू होते ही सदन को अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा की पूर्व सदस्य मंगलीबाई रावटे के निधन की सूचना दी गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सदन के सदस्यों ने उनके सार्वजनिक जीवन और योगदान को याद करते हुए शोक व्यक्त किया।
प्रश्नकाल में उठा गौवंशीय पशुओं का मुद्दा
विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश में गौवंशीय पशुओं के संवर्धन और कृत्रिम गर्भाधान की व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई। सदस्यों ने राज्य में गौवंशीय पशुओं की कुल संख्या और पशुधन विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी मांगी।
इस पर जवाब देते हुए मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में गौवंशीय पशुओं की संख्या 99.84 लाख है। उन्होंने कहा कि राज्य में कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की पर्याप्त व्यवस्था है और पशुधन की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही दूध उत्पादन को बढ़ाकर उसे राष्ट्रीय औसत के स्तर तक लाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
योजना की राशि सरेंडर होने पर सरकार से जवाब तलब
विधानसभा में योजनाओं की राशि सरेंडर होने का मुद्दा भी उठाया गया। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इस पर सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
इस पर मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि जिन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई, उन्हें बंद करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि योजना बंद होने के पीछे यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
रायगढ़ में अलसी बीज वितरण पर भ्रष्टाचार के आरोप
सदन में रायगढ़ जिले में अलसी के बीज वितरण को लेकर भी मामला गरमाया। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि बीज निगम ने नियमों की अनदेखी करते हुए अपने पसंदीदा ठेकेदार से बीज खरीदे, जिससे भ्रष्टाचार हुआ।
उन्होंने कहा कि बीजों की ग्रेडिंग के लिए आवश्यक व्यवस्था तक नहीं थी और यहां तक कि छननी जैसी बुनियादी व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इस मामले में बीज निगम के प्रबंध निदेशक और बीज प्रमाणीकरण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन
मामले में उठे सवालों पर मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि सक्षम अधिकारी से पूरे मामले का परीक्षण कराया जाएगा और यदि कोई भी अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।