छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah द्वारा मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने के लक्ष्य के बाद से इलाके में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
सुरक्षा बल उत्तर और दक्षिण बस्तर के घने जंगलों, अबूझमाड़ और नेशनल पार्क क्षेत्र के कोर इलाकों में लगातार सर्च अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य सक्रिय नक्सली नेटवर्क को कमजोर करना और उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करना है।
सरेंडर के लिए दिया गया अंतिम मौका
सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कई नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने की अपील की जा रही है। बताया जा रहा है कि जिन नक्सलियों के नाम सुरक्षा बलों की सूची में हैं, उनके पास सरेंडर करने के लिए अब करीब 17 दिन का समय बचा है।
यदि इस अवधि के भीतर वे आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।
कई बड़े इनामी नक्सली भी रडार पर
फोर्स की हिट लिस्ट में कई बड़े इनामी नक्सली शामिल हैं। इनमें 40-40 लाख रुपये के इनामी पापाराव कुड़म उर्फ सुन्नम चंदैरया उर्फ मंगू दादा उर्फ चन्द्रना और केसा सोढ़ी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा 8-8 लाख रुपये के इनामी हेमला विज्जा और चंदर कतलाम भी सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर हैं। वहीं 5-5 लाख रुपये के इनामी किशोर उर्फ आयतु डोडी, विजय रेड्डी, मगेंश परचापी उर्फ सोमलू और मनीषा कोर्राम समेत अन्य कई नक्सलियों के नाम भी सूची में बताए जा रहे हैं।
बस्तर में लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन
सुरक्षा बलों के अनुसार बस्तर क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन का उद्देश्य नक्सलियों की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना है। फोर्स का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।