रायपुर। मक्का और कनकी की कीमतों में तेजी का असर अब सीधे पोल्ट्री कारोबार और अंडों की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। एथेनॉल उत्पादन में इन कृषि उत्पादों की बढ़ती खपत के कारण इनके बाजार भाव में वृद्धि हुई है। इसका नतीजा यह हुआ कि मुर्गी दाना महंगा हो गया और अंडों की उत्पादन लागत में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, पहले एक अंडे के उत्पादन पर लगभग 4 रुपये का खर्च आता था, जो अब बढ़कर करीब 5 रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में आने वाले समय में खुदरा बाजार में अंडा 6 रुपये से कम कीमत पर मिलना मुश्किल हो सकता है।
मक्का और कनकी महंगे होने से बढ़ा पोल्ट्री फीड का खर्च
पोल्ट्री फीड तैयार करने में मक्का और कनकी का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया जाता है। कारोबारियों के मुताबिक, मुर्गी दाने में लगभग 60 प्रतिशत तक मक्का और कनकी का उपयोग होता है। दोनों प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी होने से फीड की लागत तेजी से बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, पहले मुर्गी दाना करीब 32 रुपये प्रति किलो मिलता था, जबकि अब इसकी कीमत बढ़कर लगभग 46 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे पोल्ट्री फार्म संचालकों के सामने उत्पादन लागत को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कनकी की कीमत में तेज उछाल
कनकी के दामों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। पहले थोक बाजार में कनकी करीब 20 रुपये प्रति किलो उपलब्ध थी, जबकि खुदरा बाजार में इसका भाव लगभग 22 रुपये प्रति किलो था। अब थोक बाजार में इसकी कीमत बढ़कर करीब 27 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कनकी का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में भी किया जाता है। मांग बढ़ने के साथ इसकी उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
मक्का 18 रुपये से बढ़कर 26-28 रुपये तक पहुंचा
मक्का की कीमतों में भी बड़ी तेजी आई है। पहले थोक बाजार में मक्का करीब 18 रुपये प्रति किलो और खुदरा में लगभग 20 रुपये प्रति किलो उपलब्ध था। अब इसके थोक भाव करीब 26 से 28 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। मक्का एथेनॉल उत्पादन के साथ-साथ पशु एवं पोल्ट्री फीड का भी महत्वपूर्ण घटक है। कीमतों में वृद्धि का सीधा असर मुर्गी दाना तैयार करने की लागत पर पड़ रहा है।
एक अंडे की उत्पादन लागत अब करीब 5 रुपये
पोल्ट्री कारोबारियों का कहना है कि बढ़ते फीड खर्च के कारण एक अंडे की उत्पादन लागत में लगभग 1 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां एक अंडा तैयार करने में करीब 4 रुपये का खर्च आता था, वहीं अब यह लागत लगभग 5 रुपये हो गई है। पोल्ट्री कारोबारी धनराज बैनर्जी के अनुसार, मुर्गी दाना महंगा होने से अंडा उत्पादन का खर्च बढ़ा है और इसका असर अंततः बाजार में मिलने वाली कीमतों पर पड़ना तय है।
थोक और खुदरा बाजार में बढ़ सकती हैं कीमतें
बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए पोल्ट्री कारोबारियों का मानना है कि फार्म स्तर पर अंडों की कीमत लगभग 5.25 से 5.50 रुपये प्रति नग के आसपास बनी रह सकती है। थोक बाजार में यह कीमत करीब 5.75 रुपये तक पहुंच सकती है, जबकि खुदरा बाजार में अंडा 6 रुपये से कम मिलना मुश्किल हो सकता है। वर्तमान में पोल्ट्री स्तर पर अंडों की कीमत करीब 5.35 रुपये प्रति नग बताई जा रही है। वहीं कुछ चिकन दुकानों में अंडा लगभग 6 रुपये और अन्य खुदरा एवं किराना दुकानों में करीब 7 रुपये प्रति नग तक बिक रहा है।
गर्मियों में सस्ता अंडा मिलने की संभावना भी कम
आमतौर पर गर्मी के मौसम में अंडों की मांग कम होने पर कीमतों में गिरावट देखने को मिलती थी और कई बार अंडा 3 से 4 रुपये प्रति नग तक उपलब्ध हो जाता था। लेकिन इस बार उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट की संभावना कम बताई जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि यदि मक्का, कनकी और पोल्ट्री फीड की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो अंडों के दाम पर लगातार दबाव बना रह सकता है।
विटामिन और अन्य सामग्री भी हुई महंगी
पोल्ट्री कारोबारियों के सामने केवल फीड की बढ़ी कीमत ही चुनौती नहीं है। मुर्गियों के पोषण के लिए उपयोग किए जाने वाले विटामिन और अन्य उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, पहले कुछ विटामिन करीब 500 से 600 रुपये प्रति किलो के दायरे में मिलते थे, जबकि अब इनकी कीमत बढ़कर लगभग 1,100 से 1,200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इनमें से कुछ उत्पाद विदेशों से आयात किए जाते हैं और वैश्विक परिस्थितियों तथा आपूर्ति संबंधी समस्याओं का असर उनकी कीमतों पर पड़ रहा है। कुल मिलाकर, मक्का, कनकी, मुर्गी दाना और पोषण सामग्री की बढ़ती लागत ने पोल्ट्री उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। यदि कच्चे माल के दामों में जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को अंडों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।