छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को कई अहम मुद्दों को लेकर सदन में तीखी चर्चा हुई। लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यों की गुणवत्ता, अधूरे निर्माण, कथित शराब घोटाले और विधायक रिकेश सेन की सुरक्षा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली।
अधूरा काम छोड़ने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग
सदन की कार्यवाही के दौरान सभापति ने लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार निर्धारित SOR दर से कम कीमत पर टेंडर लेकर काम हासिल कर लेते हैं, लेकिन बाद में निर्माण कार्य अधूरा छोड़ देते हैं। सभापति ने सुझाव दिया कि ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और उन्हें राज्य में ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो। इस पर लोक निर्माण मंत्री और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि आसंदी के सुझावों का पूरा सम्मान किया जाएगा और इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने पर विचार किया जाएगा।
सड़कों और पुलों के निर्माण को लेकर उठे सवाल
विधानसभा में विधायक विक्रम उसेंडी ने कांकेर जिले में सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण कार्य को लेकर सरकार से सवाल किए। उन्होंने बताया कि कुछ परियोजनाओं को 2010 में मंजूरी मिली थी और 2013 तक पूरा होना था, लेकिन कई काम अब तक अधूरे हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि लगभग 60 साल पुराने पुलों का अब तक जीर्णोद्धार क्यों नहीं किया गया और क्षेत्र की 11 सड़कों व पुल-पुलियों का काम कब तक पूरा होगा।
अरुण साव ने दी परियोजनाओं की स्थिति
डिप्टी सीएम और पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए कहा कि कांकेर जिले का पखांजूर मार्ग काफी महत्वपूर्ण मार्ग है और इसके चौड़ीकरण और मजबूती के लिए लगभग 91.6 किलोमीटर का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत 134 पुल-पुलियों का निर्माण प्रस्तावित था, जिनमें से 114 का निर्माण पूरा किया जा चुका है। मंत्री ने बताया कि 20 पुल-पुलियों का निर्माण ठेकेदार द्वारा अधूरा छोड़ दिया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने दो नए पुलों को राज्य मद से स्वीकृति दी है, जिनमें से एक का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।
शराब घोटाले को लेकर भी हुई तीखी बहस
सदन में कथित शराब घोटाले का मुद्दा भी उठा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आबकारी मंत्री से सवाल करते हुए पूछा कि शराब घोटाले में कुल कितनी राशि का मामला सामने आया है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अब तक कितने लोगों से वसूली की गई और कितनी राशि सरकार को वापस मिली है।बघेल ने कहा कि बिना पुख्ता जानकारी के किसी भी सदस्य को आरोप लगाने से बचना चाहिए।
रिकेश सेन की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
विधानसभा के शून्यकाल में विधायक रिकेश सेन की सुरक्षा का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं भूपेश बघेल और उमेश पटेल ने कहा कि विधायक ने अपनी जान को खतरा बताया है, जो बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने सरकार से इस मामले में स्पष्ट बयान देने की मांग की।
विपक्ष ने किया वॉकआउट
संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि उन्होंने विधायक रिकेश सेन से बातचीत की है और सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर है। हालांकि विपक्ष ने इस मामले पर सदन में औपचारिक वक्तव्य की मांग की। जब यह मांग पूरी नहीं हुई तो कांग्रेस के विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
भूपेश बघेल का सवाल
वॉकआउट के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यदि एक विधायक ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।