छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई साड़ियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से दिए गए इस वितरण में गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल अब राजनीतिक मुद्दा बनते जा रहे हैं। एक तरफ जहां कार्यकर्ता साड़ियों की खराब गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जता रहे हैं, वहीं सरकार ने मामले में जांच और सुधार का आश्वासन दिया है।
निर्धारित माप से छोटी और क्वालिटी भी खराब :
प्रदेश के कई जिलों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने शिकायत की है कि उन्हें जो साड़ियां दी गई हैं, वे मानकों के अनुरूप नहीं हैं। आरोप है कि साड़ियों का आकार निर्धारित माप से छोटा है और कपड़े की गुणवत्ता भी काफी कमजोर है। कुछ जगहों पर यह भी शिकायत सामने आई है कि साड़ियों का रंग धोने के बाद निकल रहा है, जिससे उनका उपयोग करना मुश्किल हो रहा है।
मंत्री रजवाड़े ने स्वयं की परिक्षण निकली कमी :
इन शिकायतों के सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों से गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिली हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सभी साड़ियां खराब नहीं हैं। मंत्री के अनुसार, उन्होंने स्वयं साड़ी का परीक्षण किया और उसमें कोई गंभीर कमी नहीं पाई।
खराब साड़ियों को बदलकर नई साड़ियां देने का आदेश :
हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जहां-जहां से शिकायतें आई हैं, वहां तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को खराब साड़ियों को बदलकर नई साड़ियां देने के लिए कहा गया है। इसके अलावा पूरे मामले की जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं, ताकि अगर किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
मामले ने लिया राजनीतिक रंग :
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय साड़ी वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं होती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय दी जाने वाली साड़ियों की गुणवत्ता इतनी खराब होती थी कि उनका उपयोग करने के बजाय लोग अन्य कामों में इस्तेमाल करते थे।
वहीं, दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है और इसे भ्रष्टाचार तथा लापरवाही का मामला बता रहा है। साड़ी वितरण को लेकर उठे इस विवाद ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।