राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत कंप्यूटर खरीदी में हुई गड़बड़ी के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एसीबी की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार को विशेष अदालत में करीब 1700 पन्नों का चालान पेश किया गया, जिसमें मिनी इंफोटेक रायपुर और ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन से जुड़े तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है।
4.72 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप
जांच में सामने आया है कि मिनी इंफोटेक ने कंप्यूटर उपकरण सप्लाई के नाम पर करीब 4 करोड़ 72 लाख 88 हजार 462 रुपए की गड़बड़ी की। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120 (बी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
फर्जी दस्तावेजों से शासन को लगाया चूना
आरोप है कि मिनी इंफोटेक के संचालक आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा ने मिलकर आपराधिक साजिश रची। इन्होंने फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
18 जिलों के स्कूलों में होना था उपकरण वितरण
राज्य के 18 जिलों की शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं में कंप्यूटर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एलएफडी और टीएफटी मॉनिटर उपलब्ध कराए जाने थे।
वर्ष 2010-11 और 2011-12 में मिनी इंफोटेक ने कुल 492 मॉनिटर सप्लाई किए
वहीं ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन ने 392 मॉनिटर उपलब्ध कराए
एचपी और एग्माटेल के नाम पर फर्जी लेटर
चालान में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने एचपी और एग्माटेल कंपनियों के नाम पर फर्जी ऑथराइजेशन लेटर तैयार किए। इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए सप्लाई को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
बाजार से दोगुनी कीमत पर खरीदी
जांच में पाया गया कि एक मॉनिटर की कीमत 1,26,500 रुपए दिखाई गई, जबकि उसकी वास्तविक बाजार कीमत करीब 57,950 रुपए थी। इस तरह सुनियोजित तरीके से कीमत बढ़ाकर शासन को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में जांच एजेंसी ने संबंधित शासकीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। अब इस मामले में अदालत में सुनवाई के दौरान आरोप तय किए जाएंगे और दोषियों पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।