रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती से जुड़े करीब 12 साल पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि महिलाओं के लिए निर्धारित आरक्षित पदों को बिना किसी वैधानिक आधार के पुरुष अभ्यर्थियों से नहीं भरा जा सकता। कोर्ट ने रायपुर नगर निगम की वर्ष 2013-14 की सहायक शिक्षक भर्ती में ओबीसी महिला वर्ग के 12 पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति को नियमों के विपरीत माना है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की अदालत ने इस मामले में याचिकाकर्ता नम्रता देवांगन को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान को देखते हुए रायपुर नगर निगम को 3 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है।
204 सहायक शिक्षक पदों पर हुई थी भर्ती
रायपुर नगर निगम ने वर्ष 2013-14 में सहायक शिक्षक यानी शिक्षाकर्मी वर्ग-3 (विज्ञान) के कुल 204 पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। इनमें ओबीसी महिला अभ्यर्थियों के लिए 12 पद आरक्षित किए गए थे। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन 12 पदों पर महिला अभ्यर्थियों के बजाय पुरुष उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी गई। इसी फैसले को चुनौती देते हुए धमतरी निवासी नम्रता देवांगन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
60.70 अंक मिलने के बावजूद नहीं मिली नियुक्ति
नम्रता देवांगन ने अपनी याचिका में बताया कि उन्होंने ओबीसी महिला वर्ग में 60.70 अंक हासिल किए थे। मेरिट सूची में उनका स्थान 1594वां था। उनका आरोप था कि महिला वर्ग के लिए निर्धारित पद पुरुष उम्मीदवारों को दिए जाने के कारण उन्हें वर्ष 2014 में नियुक्ति का अवसर नहीं मिल सका। दूसरी ओर, नगर निगम ने अपने फैसले को उचित ठहराने के लिए वर्ष 1997 के एक सर्कुलर का हवाला दिया था। निगम का कहना था कि ओबीसी महिला वर्ग की पात्र अभ्यर्थी न्यूनतम निर्धारित अंक हासिल नहीं कर सकीं, इसलिए खाली रह गए पदों को उसी आरक्षित वर्ग के पुरुष अभ्यर्थियों से भर दिया गया।
हाईकोर्ट ने निगम की दलील को नहीं माना
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नगर निगम के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षित पदों को पुरुष अभ्यर्थियों से भरने के लिए स्पष्ट वैधानिक प्रावधान होना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि महज एक सर्कुलर के आधार पर महिला आरक्षित पदों को पुरुष उम्मीदवारों से भरना नियमसम्मत नहीं था। इस प्रक्रिया के कारण याचिकाकर्ता को निर्धारित समय पर नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पाया।
12 पुरुष शिक्षकों की नौकरी पर नहीं आया संकट
हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद करीब 12 साल पहले नियुक्त किए गए 12 पुरुष शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश नहीं दिया गया। अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि इन शिक्षकों ने लंबे समय तक सेवा की है। वहीं, याचिकाकर्ता नम्रता देवांगन को बाद में गणित शिक्षिका के पद पर नियुक्ति मिल चुकी है। ऐसे में अदालत ने लंबे समय से कार्यरत पुरुष शिक्षकों की सेवा समाप्त करने के बजाय याचिकाकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई का रास्ता अपनाया।
नम्रता देवांगन को मिलेगा 3 लाख रुपये मुआवजा
भर्ती प्रक्रिया में नगर निगम की गलती से याचिकाकर्ता को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया। अदालत ने रायपुर नगर निगम कमिश्नर को नम्रता देवांगन के पक्ष में 3 लाख रुपये का मुआवजा भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के जरिए हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण से जुड़े पदों को दूसरे वर्ग के अभ्यर्थियों से भरने की प्रक्रिया केवल प्रशासनिक निर्णय के आधार पर नहीं की जा सकती, बल्कि उसके लिए वैधानिक नियमों का पालन आवश्यक है।