कृषि प्रधान और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले छत्तीसगढ़ में निवेश के पारंपरिक तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले महिलाएं अपनी बचत को सोना, चांदी या जमीन में लगाना ज्यादा सुरक्षित मानती थीं, वहीं अब वे आधुनिक वित्तीय विकल्पों की ओर तेजी से आकर्षित हो रही हैं। खासतौर पर शेयर बाजार में निवेश के प्रति महिलाओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
कम समय में हजारों महिलाओं ने खोले डीमैट खाते
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात महीनों में छत्तीसगढ़ की 44 हजार से अधिक महिलाओं ने ट्रेडिंग के लिए डीमैट खाते खुलवाए हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि महिलाएं अब वित्तीय मामलों में पहले से ज्यादा सक्रिय और जागरूक हो रही हैं। हालांकि कुल निवेशकों की संख्या में पुरुष अभी भी आगे हैं, लेकिन महिलाओं की भागीदारी की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है, जो राज्य की आर्थिक सोच में सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है।
राज्य में तेजी से बढ़ रहा निवेश आधार
आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर 2025 तक छत्तीसगढ़ में कुल डीमैट खातों की संख्या 22,87,175 तक पहुंच गई है। मार्च 2025 में यह संख्या 20,90,571 थी, यानी सिर्फ सात महीनों में लगभग 9.40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।यह वृद्धि बताती है कि राज्य में लोग अब पारंपरिक बचत से आगे बढ़कर निवेश के आधुनिक विकल्पों को अपना रहे हैं।
क्या होता है डीमैट खाता?
डीमैट यानी “डीमैटरियलाइजेशन” खाता एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां शेयर, बॉन्ड और अन्य वित्तीय साधन इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं। यह बैंक खाते की तरह काम करता है, लेकिन इसमें नकदी की जगह निवेश से जुड़े दस्तावेज होते हैं।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों के अनुसार, शेयर बाजार में निवेश करने, म्यूचुअल फंड खरीदने या आईपीओ में आवेदन करने के लिए डीमैट खाता होना जरूरी है। इससे निवेश प्रक्रिया सरल होती है और कागजी दस्तावेजों से जुड़े जोखिम भी खत्म हो जाते हैं।
महिलाओं की भागीदारी में तेज उछाल
इस पूरे बदलाव का सबसे सकारात्मक पहलू महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। मार्च 2025 में राज्य में महिला डीमैट खाताधारकों की संख्या 4,35,252 थी। सात महीनों में 44,414 नई महिलाओं के जुड़ने से यह संख्या तेजी से बढ़ी है। महिला निवेशकों की वृद्धि दर 10.20 प्रतिशत रही, जो पुरुषों की 9.19 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है। यह दर्शाता है कि महिलाएं अब न केवल बचत कर रही हैं, बल्कि अपने पैसों को सही जगह निवेश करने के लिए भी आगे आ रही हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है। अब महिलाएं घर तक सीमित नहीं रहकर वित्तीय निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स के जरिए निवेश करना आसान हो गया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर बाजार से जुड़ रहे हैं।