अम्बिकापुर: छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर से कटघोरा के बीच बनने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग-130 की फोरलेन परियोजना में अब दो बड़े बदलाव किए गए हैं। इस परियोजना में लखनपुर में बाईपास निर्माण और लेमरू क्षेत्र में हाथियों के लिए अंडरपास जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल की गई हैं। यह निर्णय क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधारने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
लखनपुर में बाईपास से मिलेगी राहत
लखनपुर नगर लंबे समय से भारी वाहनों के दबाव और बढ़ती दुर्घटनाओं की समस्या से जूझ रहा था। फोरलेन सड़क सीधे नगर के भीतर से गुजरती थी, जिससे ट्रैफिक जाम और हादसों का खतरा बना रहता था। अब बाईपास निर्माण के निर्णय से नगर के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम होगा दुर्घटनाओं में कमी आएगी, स्थानीय लोगों को सुरक्षित और सुगम यातायात सुविधा मिलेगी।
लेमरू में हाथियों के लिए अंडरपास
लेमरू क्षेत्र ‘हाथी प्रोजेक्ट’ के तहत एक संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र है। यहां हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सड़क पर अंडरपास और बैरिकेटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इस फैसले से हाथियों के सड़क पार करने में आसानी होगी। वन्यजीवों की मौत के मामलों में कमी आएगी, सड़क और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित होगा।
सिंहदेव की पहल से शुरू हुई प्रक्रिया
इस बदलाव की शुरुआत 8 मार्च को हुई, जब पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर दोनों सुझाव दिए। इसके बाद 20 अप्रैल को राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को डीपीआर संशोधन के निर्देश दिए गए हैं। परियोजना में दोनों प्रस्तावों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
जनहित और पर्यावरण की दोहरी जीत
टी.एस. सिंहदेव ने इस फैसले को जनहित और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया। उनका कहना है कि इससे एक ओर लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
क्या है इस फैसले का महत्व?
अम्बिकापुर–कटघोरा फोरलेन परियोजना में यह बदलाव सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा उदाहरण है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर चला जा रहा है। यह समाचार उपलब्ध जानकारी और आधिकारिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। परियोजना से जुड़े अंतिम निर्णय और कार्यान्वयन में समयानुसार बदलाव संभव हैं।