नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में एक बार फिर देश की युवा प्रतिभाओं का दम देखने को मिला। डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर हुए इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के सोमेश्वर प्रसाद गंजीर ने अपने प्रभावशाली भाषण से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
देशभक्ति से शुरुआत, विचारों से प्रभाव
सोमेश्वर ने अपने संबोधन की शुरुआत देशभक्ति से जुड़ी शायरी से की, जिसमें उन्होंने देश के वीर शहीदों को नमन किया। इसके बाद उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों, उनके संघर्ष और समाज में समानता स्थापित करने के प्रयासों को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। उनके शब्दों में जोश और संवेदनशीलता दोनों का अनूठा संगम देखने को मिला।
तालियों से गूंजता रहा सभागार
जैसे-जैसे उनका भाषण आगे बढ़ता गया, सभागार में मौजूद लोग बार-बार तालियों के जरिए उनका उत्साहवर्धन करते रहे। उन्होंने अपने भाषण का समापन छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि लक्ष्मण मस्तुरिया के चर्चित गीत ‘मोर संग चलाव रे’ की पंक्तियों के साथ किया, जिसने सभी का दिल जीत लिया।
लोकसभा अध्यक्ष ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में मौजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी उनके प्रदर्शन से काफी प्रभावित नजर आए। कार्यक्रम के बाद उन्होंने सोमेश्वर से मुलाकात कर उनकी सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
बस्तर के छोटे गांव से राष्ट्रीय मंच तक
उत्तर बस्तर के कांकेर जिले के पूसवाड़ा गांव से आने वाले सोमेश्वर ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। वे पिछले चार वर्षों से राष्ट्रीय युवा महोत्सव में लगातार राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय भाषण प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए चैंपियन बनने का गौरव भी हासिल किया।
युवा संसद से संसद भवन तक का सफर
सोमेश्वर ने ‘विकसित भारत युवा संसद’ में भाग लेकर अपनी वक्तृत्व कला का प्रदर्शन किया था। इसी मंच पर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में बोलने का मौका मिला।