छत्तीसगढ़ सरकार ने भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में सख्त रुख अपनाया है। अब ऐसे अधिकारी और कर्मचारी, जो सेवा निवृत्त हो चुके हैं या जल्द रिटायर होने वाले हैं, वे भी कार्रवाई से नहीं बच पाएंगे। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासकीय राशि के गबन के मामलों में सेवानिवृत्ति के बाद भी कार्रवाई की जाए।
विभागीय जांच बंद होने पर जताई चिंता
लोक आयोग ने बताया कि कई मामलों में विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान आरोपी अधिकारी रिटायर हो जाते हैं। इसके बाद तकनीकी आधार पर प्रकरण समाप्त कर दिए जाते हैं, क्योंकि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के तहत कुछ परिस्थितियों में विभागीय जांच जारी रखना संभव नहीं होता। आयोग का कहना है कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और दोषी अधिकारी कार्रवाई से बच निकलते हैं।
पेंशन रोकने और राशि वसूलने का प्रावधान
आयोग ने स्पष्ट किया है कि पेंशन नियमों में राज्यपाल को गंभीर मामलों में दोषी अधिकारियों की पेंशन रोकने या वापस लेने का अधिकार दिया गया है। साथ ही सरकारी धन की हानि की भरपाई के लिए बकाया राशि वसूली का भी प्रावधान मौजूद है। इसके बावजूद कई विभाग इन नियमों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं।
सभी विभागों को जारी किए गए निर्देश
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य के सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि लोक आयोग द्वारा सुझाए गए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में पेंशन नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
सरकारी नुकसान की होगी भरपाई
लोक आयोग ने कहा है कि नियम 8, 9 और 65 के तहत राज्य सरकार के पास दोषी अधिकारियों की पेंशन रोकने, वापस लेने और सरकारी धन की वसूली करने का अधिकार है। आयोग का मानना है कि इन प्रावधानों का सही इस्तेमाल होने से आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी और प्रशासनिक जवाबदेही भी मजबूत होगी.