रायपुर जिले में बच्चों में कुपोषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में लगातार प्रयास और करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी कुपोषण का शिकार हैं। हाल ही में किए गए सर्वे में स्थिति एक बार फिर सामने आई है।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
वर्ष 2025 में आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों के वजन और पोषण स्तर की जांच की गई। विभागीय जानकारी के मुताबिक इस दौरान करीब 2 हजार बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में पाए गए। वहीं मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या 15 से 17 हजार के बीच बताई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि गंभीर कुपोषित बच्चों में अधिकांश नवजात से लेकर 6 महीने तक की आयु के हैं, जिनकी देखभाल और पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
एक लाख से ज्यादा बच्चों का हुआ वजन परीक्षण
वजन त्योहार के दौरान जिले में एक लाख से अधिक बच्चों का वजन मापा गया। इस प्रक्रिया में कई बच्चों का वजन बेहद कम पाया गया, जिसके चलते उन्हें कुपोषित श्रेणी में शामिल किया गया।
बताया गया कि इन बच्चों की उम्र कुछ दिनों से लेकर करीब दो वर्ष तक की है। ऐसे बच्चों के लिए विशेष पोषण आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उनकी स्थिति में जल्द सुधार हो सके।
पिछले वर्षों में आई कमी, लेकिन रफ्तार धीमी
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुपोषित बच्चों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आई है, लेकिन यह गिरावट अपेक्षा के अनुसार तेज नहीं है।
वर्ष 2023 में 20,600 मध्यम और 3,662 गंभीर कुपोषित बच्चे दर्ज हुए
वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 20,185 मध्यम और 3,081 गंभीर हो गई
वर्ष 2025 में 17,613 मध्यम और 2,651 गंभीर कुपोषित बच्चे सामने आए
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले तीन वर्षों में यह कमी बहुत धीमी रही है और अभी भी इस दिशा में और प्रयासों की जरूरत है।
कुपोषण से बचाव के लिए किए जा रहे उपाय
कुपोषण को रोकने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार देना, बच्चों का समय पर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, विटामिन सप्लीमेंट और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का पूरा असर नहीं दिख रहा, जिससे चिंता बनी हुई है।
तिल्दा-अभनपुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले
जिले में कुपोषण के मामले सबसे ज्यादा तिल्दा और अभनपुर ब्लॉक में सामने आए हैं। एक वर्ष पहले के आंकड़ों के अनुसार इन क्षेत्रों में कुपोषित बच्चों का प्रतिशत 16.55 तक पहुंच गया था, जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक है।
इसके अलावा आरंग, धरसींवा, मंदिर हसौद और रायपुर शहर के कई हिस्सों में भी कुपोषण की समस्या बनी हुई है। खासकर शहरी बस्तियों और बीएसयूपी कॉलोनियों में कुपोषित बच्चों की संख्या ज्यादा पाई गई है।
बस्तियों में ज्यादा गंभीर स्थिति
रायपुर शहर के भाठागांव जैसे इलाकों में, जहां बीएसयूपी कॉलोनियां अधिक हैं, वहां कुपोषण की स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। एक आंगनबाड़ी प्रभारी के अनुसार, केवल उनके क्षेत्र में ही 40 से अधिक गंभीर कुपोषित बच्चे दर्ज किए गए हैं।