छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के हालिया परिणामों ने बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी में आयोजित इस परीक्षा में शामिल हुए कई सरकारी शिक्षक क्वालिफाई नहीं कर सके, जिसके कारण अब उनकी पदोन्नति पर संकट मंडराने लगा है।
80 हजार से ज्यादा शिक्षक प्रभावित
प्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर लगभग 1.93 लाख शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से करीब 42 प्रतिशत यानी लगभग 80 हजार शिक्षक अब तक TET पास नहीं कर पाए हैं। TET को अनिवार्य बनाए जाने के बाद इन शिक्षकों के प्रमोशन पर सीधा असर पड़ रहा है।
विभाग ने मांगी जानकारी, निर्णय लंबित
लोक शिक्षण संचालनालय ने जिलों से ऐसे शिक्षकों की संख्या मांगी है, जो TET क्वालिफाई नहीं हैं। हालांकि विभागीय स्तर पर अलग से TET परीक्षा कराने की चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस निर्णय या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
जिलों में अलग-अलग हालात
TET में असफल शिक्षकों की संख्या हर जिले में अलग-अलग है। राजधानी रायपुर में यह संख्या सबसे कम है, जहां 376 शिक्षक ही TET पास नहीं कर पाए हैं। वहीं कोंडागांव जिले में सबसे अधिक 5334 शिक्षक अब भी पात्रता परीक्षा में सफल नहीं हो सके हैं। अन्य जिलों में भी हजारों की संख्या में शिक्षक इस सूची में शामिल हैं।
नियमों की सख्ती से बढ़ा दबाव
राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देश और न्यायालय के आदेश के अनुसार अब प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य कर दिया गया है। इसी वजह से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने परीक्षा दी, लेकिन सफलता प्रतिशत कम रहने से स्थिति चिंताजनक हो गई है।
शिक्षक संघ ने उठाई मांग
शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि सरकार विभागीय स्तर पर TET परीक्षा आयोजित करे, ताकि असफल शिक्षकों को एक और मौका मिल सके। इससे उनके प्रमोशन और करियर पर पड़े प्रभाव को कम किया जा सकेगा।