रांची: झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। 14वीं JPSC PT और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच छात्रों और सरकार के बीच हुई तीसरे दौर की बातचीत भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। करीब पांच घंटे चली बैठक के बावजूद JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर सहमति नहीं बन पाई। इस बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों के इस्तीफे ने मामले को और गंभीर बना दिया है। छात्रों ने वार्ता विफल होने के बाद सोमवार को विधानसभा मार्च का ऐलान किया है। प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इलाके में प्रतिबंध लागू कर दिए हैं।
5 घंटे की बैठक के बाद भी नहीं निकला समाधान
रविवार शाम स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार की विशेष समिति और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता हुई। करीब पांच घंटे चली इस बैठक में सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा शामिल हुए। सरकार का कहना है कि छात्रों की अधिकांश मांगों पर सकारात्मक फैसला लिया जा चुका है। सरकार के मुताबिक 14वीं JPSC PT परीक्षा और ACF परीक्षा रद्द करने तथा TDPL एजेंसी से जुड़े मामले की जांच सहित करीब 98 फीसदी मांगों को स्वीकार किया गया है। हालांकि, छात्र प्रतिनिधि JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की CBI से जांच कराने की मांग पर कायम हैं। इसी मुद्दे पर वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।
JPSC के तीन सदस्यों ने दिया इस्तीफा
छात्र आंदोलन के बीच JPSC में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। आयोग की तीन सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके त्यागपत्र राजभवन भेजे गए, जिन्हें राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंजूर कर लिया। बताया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID टीम ने इन सदस्यों को पूछताछ के लिए समन किया था। इसी बीच उनका इस्तीफा सामने आया। इससे पहले आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते भी 22 जुलाई को अपने पद से हट चुके हैं। ऐसे में JPSC के शीर्ष स्तर पर अब व्यापक पुनर्गठन की स्थिति बन गई है।
CBI जांच पर सरकार ने बताया कानूनी पेंच
वार्ता के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि JSSC-CGL परीक्षा का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होने के कारण राज्य सरकार के सामने CBI जांच को लेकर कानूनी अड़चन है। सरकार ने इसके विकल्प के तौर पर कई प्रस्ताव छात्रों के सामने रखे हैं। इनमें वित्तीय लेन-देन की ED जांच, दोषियों को 90 दिनों के भीतर सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच समिति बनाने का प्रस्ताव शामिल है। लेकिन छात्र संगठनों ने इन विकल्पों को स्वीकार नहीं किया और CBI जांच तथा JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की अपनी मांग दोहराई।
आज विधानसभा मार्च का ऐलान
वार्ता विफल होने के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने सोमवार को नई विधानसभा की ओर मार्च करने की घोषणा की है। मोराबादी मैदान और पुरानी विधानसभा परिसर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के जुटने की सूचना है। आंदोलन स्थल पर छह छात्र कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर रख रही है। वहीं, संभावित विधानसभा मार्च को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है। प्रशासन ने छात्रों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन से बचने की अपील की है। मुख्यमंत्री की ओर से भी कहा गया है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए किया जाना चाहिए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्रों के बीच अगली बातचीत होती है या आंदोलन विधानसभा मार्च के साथ और बड़ा रूप लेता है।