रायपुर/नई दिल्ली। देश के विभिन्न हिस्सों में जल संकट और संभावित सूखे की चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार ने तैयारियों को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 2 सितंबर को एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और जल संसाधन से जुड़े मंत्री शामिल होंगे। बैठक का मुख्य फोकस राज्यों में पेयजल की उपलब्धता, जल संकट से निपटने की तैयारियों, संभावित सूखे के प्रभाव और भविष्य के लिए मजबूत जल प्रबंधन व्यवस्था तैयार करने पर रहेगा। साथ ही जल जीवन मिशन 2.0 के प्रस्तावित रोडमैप और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
पेयजल संकट और सूखे की स्थिति की होगी समीक्षा
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में देश के अलग-अलग राज्यों की मौजूदा जल स्थिति का आकलन किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता चुनौती बन सकती है, वहां समय रहते आवश्यक कदम उठाने की रणनीति पर विचार होगा। संभावित सूखे की स्थिति से आमजन, कृषि और ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
जल जीवन मिशन 2.0 के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा
बैठक के प्रमुख विषयों में जल जीवन मिशन 2.0 का रोडमैप शामिल रहेगा। हर घर तक नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की दिशा में चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जा सकती है। इसके साथ ही राज्यों को योजना के क्रियान्वयन के दौरान आ रही जमीनी चुनौतियों, संसाधनों की जरूरत और भविष्य की प्राथमिकताओं पर अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। केंद्र और राज्य मिलकर मिशन को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाने की रणनीति तैयार कर सकते हैं।
1 और 2 सितंबर को जल क्षेत्र पर विभागीय शिखर सम्मेलन
प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक से पहले जल शक्ति मंत्रालय की ओर से 1 और 2 सितंबर को दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें जल प्रबंधन और पेयजल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के बीच चर्चा होगी। सम्मेलन में सामने आने वाले सुझावों और प्रमुख चुनौतियों को आगे की जल नीति और कार्ययोजना में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।
जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक में केवल मौजूदा पेयजल संकट पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए जल स्रोतों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर भी चर्चा होगी। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपलब्ध जल स्रोतों की स्थिरता को मजबूत करने के उपाय प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। राज्यों की जल संरक्षण योजनाओं और स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे जल प्रबंधन मॉडल की समीक्षा भी की जा सकती है। केंद्र सरकार का लक्ष्य जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ लंबे समय तक पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
जल अवसंरचना परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की रणनीति
जल आपूर्ति और संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करना भी बैठक का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। नई जल अवसंरचना, जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और मौजूदा पेयजल स्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए राज्यों की योजनाओं पर मंथन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस बैठक में भागीदारी छत्तीसगढ़ के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में पेयजल व्यवस्था, जल संरक्षण और जल जीवन मिशन से जुड़े कार्यों को लेकर केंद्र के साथ समन्वय को और मजबूत करने की दिशा में यह बैठक अहम साबित हो सकती है।