छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सामने आए गैस गबन मामले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। जिस अधिकारी के कंधों पर जिले की खाद्य व्यवस्था की जिम्मेदारी थी, उसी पर करोड़ों रुपये के गैस घोटाले का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगा है। पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव समेत तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 15 दिनों तक चली जांच और 40 सदस्यीय टीम की पड़ताल के बाद इस पूरे गैस कांड की परतें खुलती चली गईं।
सुरक्षा के नाम पर रचा गया पूरा खेल
जानकारी के मुताबिक पिछले महीने महासमुंद में 6 एलपीजी कैप्सूल गायब होने का मामला सामने आया था। इन कैप्सूल को पुलिस ने दिसंबर 2025 में जब्त किया था। बताया जा रहा है कि सिंघोड़ा थाने में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने का हवाला देकर इन गैस कैप्सूल को “सुरक्षित स्थान” पर रखने की योजना बनाई गई। इसी बहाने कथित तौर पर करोड़ों के खेल की पटकथा तैयार हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश की शुरुआत 23 मार्च से हुई थी।
गैस एजेंसी संचालक के साथ मिलकर बनाई योजना
जांच में खुलासा हुआ कि जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव ने गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर के साथ मिलकर गैस गबन की योजना बनाई। आरोप है कि 26 मार्च की देर रात सिंघोड़ा थाने में चोरी-छिपे गैस का आंकलन किया गया और करीब 102 टन गैस गायब करने की योजना तैयार की गई।
कागजों में भी किया गया फर्जीवाड़ा
मामला सिर्फ गैस गायब करने तक सीमित नहीं रहा। जांच में यह भी सामने आया कि गैस निकालने के बाद रायपुर की ठाकुर पेट्रोकेमिकल के साथ मिलकर दस्तावेजों में भी कथित हेरफेर किया गया। जिस वजन का पंचनामा दिन में कलेक्टोरेट में जमा किया गया, उसका वास्तविक वजन रात में लिया गया था। पुलिस को शक है कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय थी और रिकॉर्ड को बाद में सेट किया गया।
80 लाख की डील, 50 लाख कैश पहुंचने का दावा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के बीच करीब 80 लाख रुपये की डील हुई थी। सूत्रों के अनुसार खाद्य अधिकारी तक 50 लाख रुपये नकद पहुंचाए गए थे। जब मामले की जांच तेज हुई तो आरोपी आरंग के एक ढाबे में बैठकर बचने की रणनीति बनाते रहे, लेकिन तकनीकी विश्लेषण और वैज्ञानिक पूछताछ के जरिए पुलिस ने पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया।
पुलिस ने जब्त किए नकदी और सामान
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लाखों रुपये के घरेलू उपकरण, मोबाइल फोन और नकदी भी बरामद की है। मामले में कई दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7 के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।