संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा शुक्रवार शाम जारी भारतीय वन सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम में छत्तीसगढ़ की बेटी सुष्मिता सिंह ने शानदार सफलता हासिल की है। राजनांदगांव में पली-बढ़ीं सुष्मिता का चयन ऑल इंडिया 32वीं रैंक के साथ भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए हुआ है। उनकी सफलता से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
शुरुआती पढ़ाई से लेकर इंजीनियरिंग तक शानदार सफर
सुष्मिता सिंह की प्रारंभिक शिक्षा राजनांदगांव के जेएमजे नवजीवन स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने रॉयल किड्स स्कूल और जैन इंटरनेशनल स्कूल, बिलासपुर में पढ़ाई की। 12वीं की शिक्षा डीपीएस भिलाई से पूरी करने के बाद उन्होंने देहरादून स्थित यूपीईएस विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया।
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने करीब एक वर्ष तक नौकरी भी की, लेकिन सिविल सेवा में जाने का सपना उन्हें लगातार प्रेरित करता रहा। आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
पांचवें प्रयास में मिली सफलता
सुष्मिता सिंह ने भारतीय वन सेवा परीक्षा में पांचवें प्रयास में सफलता हासिल की। लगातार प्रयास और धैर्य के बाद मिली इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मविश्वास से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
पिता भी रहे वन सेवा अधिकारी
सुष्मिता के परिवार का जुड़ाव भी वन सेवा से रहा है। उनके पिता बीपी सिंह भारतीय वन सेवा में अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने वन विभाग में एसडीओ से लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और मुख्य वन संरक्षक के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। ऐसे में सुष्मिता को बचपन से ही प्रशासनिक सेवा और वन संरक्षण से जुड़ा माहौल मिला, जिसने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
मां-पिता को दिया सफलता का श्रेय
अपनी सफलता पर सुष्मिता सिंह ने कहा कि वह इसका पूरा श्रेय अपनी मां की प्रेरणा और पिता के मार्गदर्शन को देती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती, परिवार का सहयोग और ईश्वर का आशीर्वाद भी बेहद जरूरी होता है। सुष्मिता की इस उपलब्धि ने प्रदेश के युवाओं, खासकर सिविल सेवा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को नई प्रेरणा दी है।