मध्य-पूर्व में बढ़ते ईरान-इजरायल तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 7 मार्च 2026 से लागू कर दी गई हैं। संभावित गैस संकट को देखते हुए सरकार ने तेल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।
दिल्ली में 913 रुपये पहुंचा घरेलू सिलेंडर
कीमतों में बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गया है। वहीं, 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर अब 1768 रुपये के बजाय 1883 रुपये में मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण यह फैसला लिया गया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा संकट
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति है। करीब 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग भारत के ऊर्जा आयात के लिए बेहद अहम है। देश अपनी लगभग 50 प्रतिशत कच्चे तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी की जरूरत इसी रास्ते से पूरी करता है। युद्ध की स्थिति के चलते इस रूट पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
कतर से LNG सप्लाई पर असर
ईरान द्वारा हाल ही में किए गए ड्रोन हमलों के बाद कतर में एलएनजी उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का करीब 40 प्रतिशत कतर से आयात करता है। ऐसे में उत्पादन रुकने से देश में गैस की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार का इमरजेंसी कदम
संभावित गैस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आपात कदम उठाए हैं। इसके तहत तेल कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी उत्पादन के लिए करने का निर्देश दिया गया है। इससे पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में इन गैसों के उपयोग पर असर पड़ सकता है।
रूस से आयात और पर्याप्त स्टॉक
सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। भारत अपनी लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत रूस से भी पूरी कर रहा है, जिससे हॉर्मुज मार्ग पर निर्भरता कुछ कम हुई है। इसके अलावा देश में पेट्रोलियम और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और रिफाइनरियों के बंद होने की खबरों को गलत बताया गया है।