छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए गए शिक्षा विभाग के कर्मचारी पर बड़ी कार्रवाई हुई है। रिश्वत लेते एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के हाथों गिरफ्तार हुए सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी गौतम सिंह आयम को अब शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
गौतम सिंह को अगस्त 2024 में 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। बाद में मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय में हुई, जहां उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए तीन साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई।
12 हजार रुपये लेते ACB ने किया था गिरफ्तार
गौतम सिंह आयम सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत थे और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय वाड्रफनगर में संलग्न थे। उनकी मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इंजानी में थी। 13 अगस्त 2024 को एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें 12 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल रामानुजगंज भेज दिया गया।
48 घंटे से ज्यादा न्यायिक अभिरक्षा में रहने पर निलंबन
सरकारी सेवा नियमों के तहत किसी कर्मचारी के 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहने पर निलंबन का प्रावधान है। इसी आधार पर तत्कालीन कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज के आदेश से गौतम सिंह आयम को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद रिश्वत से जुड़े मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।
अदालत ने माना- एरियर्स भुगतान के लिए मांगी थी रिश्वत
मामले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बलरामपुर स्थित रामानुजगंज की अदालत ने 15 मई 2026 को फैसला सुनाया। अदालत के समक्ष पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर पाया गया कि गौतम सिंह आयम ने शासकीय कार्य से जुड़े एरियर्स भुगतान के बदले शिकायतकर्ता नितेश रंजन पटेल से 20 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में 12 हजार रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार की गई।
फैसले की प्रमाणित प्रति विकासखंड शिक्षा अधिकारी, वाड्रफनगर के माध्यम से शिक्षा विभाग को प्राप्त हुई। इसके बाद विभाग ने न्यायालय के फैसले और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी, मिली 3 साल की सजा
विशेष अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गौतम सिंह आयम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधन के बाद लागू प्रावधानों की धारा 7 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
अब सरकारी नौकरी से भी बर्खास्त
न्यायालय से दोषसिद्धि के बाद शिक्षा विभाग ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई की। इसके तहत गौतम सिंह आयम को अब शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यानी अगस्त 2024 में रिश्वत लेते गिरफ्तारी से शुरू हुआ मामला अब विभागीय बर्खास्तगी तक पहुंच गया है। करीब दो साल बाद शिक्षा विभाग की ओर से यह बड़ी कार्रवाई की गई है।