रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के घरों में पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर कई उपभोक्ताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली की खपत और बिल पहले की तुलना में अधिक आ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष भी सरकार पर निशाना साध रहा है।
40 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के घर पहुंच चुके स्मार्ट मीटर
प्रदेश में करीब 60 लाख बिजली उपभोक्ताओं के मीटर बदलने की योजना पर काम जारी है। अब तक लगभग 40 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। यह कार्य टाटा और जीनस (Genus) कंपनी के माध्यम से किया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों के साथ घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के मीटर भी तेजी से बदले जा रहे हैं।
मीटर की जांच मुफ्त नहीं, देना होगा शुल्क
यदि किसी उपभोक्ता को यह संदेह है कि उसका स्मार्ट मीटर सही तरीके से काम नहीं कर रहा या बिजली बिल अपेक्षा से अधिक आ रहा है, तो वह मीटर की जांच के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन इसके लिए शुल्क निर्धारित किया गया है।
सिंगल फेज स्मार्ट मीटर जांच शुल्क: ₹500
थ्री फेज स्मार्ट मीटर जांच शुल्क: ₹1000
यही वजह है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता शिकायत होने के बावजूद मीटर जांच के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं।
खराबी मिलने पर मिलेगा बिल में संशोधन
बिजली विभाग के नियमों के अनुसार यदि जांच में मीटर खराब पाया जाता है, तो मीटर लगने की अवधि के आधार पर बिजली बिल का पुनर्मूल्यांकन किया जाता है। अधिक वसूली की स्थिति में उपभोक्ता के बिल में संशोधन करने का प्रावधान भी मौजूद है।
स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक बहस तेज
स्मार्ट मीटरों को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि नए मीटरों की वजह से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। दूसरी ओर बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था और बिजली उपभोग की सटीक निगरानी के लिए लगाए जा रहे हैं।
उपभोक्ताओं की मांग
बिजली उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उनकी जांच निशुल्क कराई जानी चाहिए, ताकि आम लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े और विवाद भी कम हो सके।