Maharaja Chhatrasal University: महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। एटीकेटी के तहत परीक्षा फॉर्म भरने का पोर्टल बंद होने और छठे सेमेस्टर में प्रवेश को लेकर हुए नए नियमों ने छात्रों के भविष्य पर तलवार लटका दी है। सोमवार को सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और जमकर नारेबाजी की।
क्या है पूरा विवाद?
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानबूझकर एटीकेटी के ऑनलाइन आवेदन पोर्टल को बंद कर दिया है, जिससे वे अपनी रुकी हुई परीक्षाएं नहीं दे पा रहे हैं। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार जब तक कोई छात्र अपने पिछले 5 सेमेस्टर की एटीकेटी क्लियर नहीं कर लेता, तब तक उसे छठे सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं है।
प्राइवेट कॉलेजों की मनमानी
विवाद तब गहरा गया जब यह बात सामने आई कि प्राइवेट कॉलेजों ने छात्रों की पात्रता न होने के बावजूद उनसे छठे सेमेस्टर की भारी-भरकम फीस जमा करा ली है। अब सवाल यह है कि यदि छात्र परीक्षा नहीं दे पाएंगे, तो उनकी फीस कौन लौटाएगा?
नोकझोंक और बाथरूम कांड
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय बेहद गरमा गया जब कुलसचिव यशवंत सिंह पटेल और छात्रों के बीच तीखी झड़प हुई। हंगामे से बचने के लिए विश्वविद्यालय का एक कर्मचारी रमाशंकर गुप्ता बाथरूम में छिप गया, जिसकी चर्चा पूरे कैंपस में रही।स्थिति अनियंत्रित होते देख सिविल लाइन थाना पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा।
सियासी और कानूनी समर्थन
छात्रों के समर्थन में यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लोकेंद्र वर्मा, कांग्रेस नेत्री कीर्ति विश्वकर्मा और जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह भी धरने पर बैठे। कीर्ति विश्वकर्मा ने प्रशासन को घेरते हुए कहा, अगर नियम यही था तो छात्रों को पहले क्यों नहीं बताया गया? कॉलेजों ने फीस क्यों वसूली?
भावुक हुए छात्र-छात्राएं
प्रदर्शन के दौरान कई छात्राएं अपने करियर को बर्बाद होता देख फूट-फूट कर रोने लगीं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर और बड़ी मुश्किल से पढ़ाई की फीस भरी है, ऐसे में पोर्टल बंद कर उन्हें परीक्षा से वंचित करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। फिलहाल, छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला है।