रायपुर: भारतमाला परियोजना से जुड़े मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ के कई जिलों में छापेमारी की है। इस दौरान भारी मात्रा में नकदी, चांदी और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
ED ने 28 अप्रैल को PMLA, 2002 के तहत अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद में कुल 8 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई रायपुर-विशाखापत्तनम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में हुए कथित घोटाले को लेकर की गई।
भारी मात्रा में कैश और चांदी जब्त
छापेमारी के दौरान एजेंसी को ₹66.9 लाख नकद, 37.13 किलोग्राम चांदी (ईंट और जेवरात) डिजिटल उपकरण और अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। ED ने इन्हें ‘अपराध की आय’ (Proceeds of Crime) से जुड़ा बताया है।
आपत्तिजनक दस्तावेज मिले
जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनसे भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर मुआवजे की राशि बढ़ाकर निकाली गई थी।
कैसे हुआ घोटाला?
ED के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची। भूमि अधिग्रहण अधिसूचना जारी होने के बाद भी जमीन के स्वामित्व में बदलाव किया गया जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अधिक मुआवजा हासिल किया गया, खसरा रिकॉर्ड में हेरफेर कर भुगतान बढ़ाया गया। इस पूरे मामले में सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई है।
FIR के बाद शुरू हुई जांच
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब ACB/EOW, रायपुर ने तत्कालीन SDO (राजस्व) निर्भय साहू और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी। इसी आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
बदसलूकी का भी आरोप
छापेमारी के दौरान कुछ स्थानों पर अधिकारियों के साथ बदसलूकी की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि ED ने जांच जारी रखते हुए आगे और खुलासों के संकेत दिए हैं। भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ED की इस कार्रवाई से साफ है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।