मुकेश प्रजापति, भैरूंदा : भैरूंदा क्षेत्र में आदिवासी संस्कृति और लोक परंपरा के प्रतीक भगोरिया हाट का उत्साहपूर्ण आगाज हो गया है। बुधवार को भैरूंदा ब्लॉक के ग्राम लाल माटी में मेले की शुरुआत हुई, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक उत्साह के साथ शामिल हुए। होली नजदीक आते ही भगोरिया का रंग भी गहराने लगा है।
परंपरा के साथ दिखा बदलाव
भगोरिया मेले में इस बार परंपराओं के साथ-साथ आधुनिकता की झलक भी साफ दिखाई दी। कभी धोती-कुर्ता और साफा पहनकर आने वाले आदिवासी युवा अब जींस और टी-शर्ट में नजर आ रहे हैं। पहनावे के साथ-साथ श्रृंगार और शहरी संस्कृति का प्रभाव भी मेले में स्पष्ट दिखा। हालांकि बुजुर्गों में अब भी पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों को लेकर वही उत्साह देखने को मिला।
मांदल-ढोलक की थाप पर डीजे भारी
भगोरिया की असली पहचान मांदल, ढोलक और झांझ-मंजीरों की थाप से होती रही है, लेकिन बदलते दौर में इनकी जगह डीजे और बैंड ने ले ली है। बुधवार को मेले में युवाओं की टोलियां डीजे की धुन पर झूमती नजर आईं, जबकि बुजुर्ग पारंपरिक मांदल की थाप पर नृत्य करते दिखे।
बदला है उत्साह का स्वरूप
स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि पहले फसल कटाई के बाद भगोरिया आता था, जिससे ग्रामीण आर्थिक रूप से निश्चिंत होकर पूरे उत्साह से मेले का आनंद लेते थे। इस बार खेतों में फसल खड़ी होने के कारण ग्रामीण कामकाज के बीच समय निकालकर मेले में पहुंच रहे हैं, जिससे उत्साह का स्वरूप कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है।
इन गांवों में लगेगा भगोरिया हाट
लाल माटी से शुरू हुआ भगोरिया हाट का सिलसिला होली तक क्षेत्र के विभिन्न गांवों में जारी रहेगा। हाट बाजार के दिनों में पागरी, लाडकुई, ब्रिजिशनगर, कोलारडेम, जीवनताल, बावड़ियाचोर, नादान, चकल्दी, भैंसान, पिपलानी और बसंतपुर सहित अन्य गांवों में भी मेले का आयोजन किया जाएगा।