रिपोर्टर सौम्या यादव//धमतरी: पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम मंदरौद के युवक मोहन साहू ने विलुप्त होती गौरैया चिड़िया को बचाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया, जिसका असर अब पूरे गांव में साफ दिखाई दे रहा है।
गौरैया संरक्षण की पहल
मोहन साहू का कहना है कि कुछ साल पहले तक गांव में हर तरफ गौरैया की चहचहाहट सुनाई देती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह नन्ही चिड़िया विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई। इसके पीछे घोंसलों की कमी और प्राकृतिक आवास का खत्म होना एक बड़ी वजह थी। इसी समस्या को समझते हुए मोहन साहू ने गौरैया संरक्षण की पहल की। उन्होंने गांव के विभिन्न हिस्सों में लकड़ी, टीन और अन्य सामग्री से घोंसले तैयार करवाए और उनमें दाना-पानी की नियमित व्यवस्था शुरू की।

जीवंत हो उठा वातावरण
उनकी इस मेहनत का परिणाम अब स्पष्ट दिखाई दे रहा है। आज स्थिति यह है कि गांव के लगभग 80 प्रतिशत घोंसलों में गौरैया अपने परिवार के साथ निवास कर रही हैं। सुबह-शाम पूरे गांव में गौरैया की चहचहाहट गूंजती रहती है, जिससे वातावरण जीवंत हो उठा है।
पर्यावरण और पक्षी संरक्षण के प्रति हो रहे जागरूक
इस अभियान की सराहना केवल गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी इसकी खूब चर्चा हो रही है। मोहन साहू की इस पहल से प्रेरित होकर अब स्कूली बच्चे भी पर्यावरण और पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं। मोहन साहू लगातार बच्चों और ग्रामीणों को घोंसले और दाना-पानी उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं, ताकि गौरैया का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रह सके और यह नन्हा पक्षी हमेशा के लिए इस क्षेत्र का हिस्सा बना रहे।
