सैय्यद वाजिद मुंगेली//छत्तीसगढ़ अपनी परंपराओं के लिए जाना जाता है. यहां हजारों देवी-देवता बसते हैं. लेकिन इन सब में एक ऐसा भी मंदिर है जिसके बारे में आपने न कही देखा और सुना होगा. इस मंदिर को अब तक किसी तरह ख्याति प्राप्त नही है पर इसपर जिम्मेदारों की नजर जाए तो इसे विख्यात होने में ज्यादा वक्त नही लगेगा. यह प्राचीन मंदिर भारत ही नही अपितु विश्व का ऐसा एकलौता मंदिर है जो भगवान शिव पर आधारित है....इस मंदिर को कब किसने बनाया यह स्पष्ट नही है लेकिन मान्यता यह है कि द्वापर युग मे 6 मासी रात में इसका निर्माण किया गया होगा...प्राचीन यह शिव मंदिर जिसे देखकर आप कहेंगे वाकई में यह मंदिर अद्भुत है...जो मुंगेली जिला मुख्यालय से महज 12 किमी की दूरी पर नारायणपुर पंचायत पर स्थित है...
सावन का पावन महीना शुरू हो गया है. सावन के महीने में वैसे तो सभी दिन खास होता है लेकिन सोमवार का अलग महत्त्व होता है..सावन के महीने में भगवन शिव की आराधना के लिए सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है. छत्तीसगढ़ में भी सभी मंदिरों में भक्तों का ताता लगा रहता है. लेकिन हम आपको ऐसे मंदिर से इस सावन के महीने में बताएंगे और दिखाएंगे जिसके बारे में आपने शायद कहि ना सुना और ना देखा होगा. भले ही यह विश्व का इकलौता मंदिर है लेकिन इस मंदिर को किसी तरह की ख्याति प्राप्त नही होने की वजह से यहां केवल आसपास के लोग और जो इस मंदिर पर आस्था रखते है बस वो ही पूजा अर्चना के लिए पहुचते है. यह प्राचीन मंदिर छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर नारायणपुर पंचायत में स्थित है..यह भगवान शिव पर आधारित मंदिर है..यह मंदिर का निर्माण कब किसने बनाया यह किसी को स्पष्ट जानकारी नही है ग्रामीणों ने बताया कि उनके पूर्वजों ने जो उन्हें बताया है उसी मान्यता पर यह मंदिर का निर्माण रतनपुर व भोरमदेव के समकालीन नागवंशी राजा द्वारा 6 वीं शताब्दी से 10 वीं शताब्दी के द्वापर युग के 6 मासी रात में कराया गया होगा...यह मंदिर करीब हजार साल पुराना बताया जाता है..इस मंदिर की बनावट भी काफी अनोखी और अद्भुत है...गांव के बड़े सबसे पुराने तालाब के मेढ़ पर बनी यह मंदिर अपने आप में एक कहानी रचती है क्योंकि तालाब के मेढ़ पर प्राचीन मंदिर का निर्माण अकस्मात है..इस मंदिर के निर्माण में चुना मिट्टी व बेल के रस का प्रयोग किया गया है यही वजह है कि आज भी यह मंदिर मजबूती के साथ खड़ा है...मंदिर की बाहरी दीवारों में हस्तशिल्प से बनाई गई कई देवी-देवताओं की मूर्तियां मंदिर की खूबसूरती को प्रदर्शित करती है...वही मंदिर में बने गवाक्ष (खिड़की) यह बात भी स्पष्ट करती है कि ऐसा मंदिर प्राचीन मंदिरो में बहुत कम देखने को मिलता है...वही मंदिर की चारो ओर बनी राजहंस की बनी मूर्ति परिक्रमा करती नजर आती है...ग्रामीणों का कहना है कि इस मंदिर में एक युवक निर्वस्त्र होकर कलश लगाने के लिए रात्रि में चढ़ा था तब युवक की बहन उसे निर्वस्त्र स्थिति में देख ली थी जिसपर वह हया की वजह से गिरकर अपनी जान दे दी उसके बाद यहां पीपल के बड़े वृक्ष हुआ था जो मंदिर को छाव देता था बाद में यह पेड़ गिरकर नष्ट हो गया जिसे बुजुर्गों ने देखा भी था...यही वजह है कि उसके बाद कभी इस मंदिर पर कलश नही लग पाया...वही जब आप इस मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करेंगे तब आपको सालो पुरानी 3 शिवलिंग व नन्दी दिखाई देंगे वही इसके ठीक ऊपर कई देवी-देवताओं का हस्तशिल्प से चित्रण किया गया है...यह मंदिर आखिर विश्व का एकमात्र मंदिर क्यों इसके बारे में हम आपको बताते है कि आपने विश्व की कई मंदिर देखी होगी यहां तक कि खजुराहो और भोरमदेव की मंदिर में जहा आपको मंदिर की बाहरी दीवारों पर मिथुन मूर्ति देखने को मिलता है पर इस मंदिर के गर्भ गृह में ही अंदर दीवारों पर मिथुन मूर्तियां अपनी ओर आकर्षित करती है...यही वजह है कि यह भारत ही नही विश्व का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहा मंदिर के गर्भ गृह में मिथुन मूर्तियों का चित्रण किया गया है इस मंदिर के गर्भ गृह में जाने से आपको बर्तन गिरने,घुंघरू सर्प फुंकार जैसी आवाज सहित कई तरह की आवाज सुनाई देगी लेकिन यह आवाज कहा से और कैसे आती है यह अब भी रहस्य बना हुआ है...इस मंदिर के ठीक ऊपर चौपर बना हुआ है जहां लोग पूजा अर्चना करके मनोरंजन भी करते होंगे..यहां आसपास के लोग अपनी मनोकामना लेकर जब यहां आते है वो भगवान भोलेनाथ पूर्ण करते है..यही वजह है कि लगातार यहां भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है.!
भगवान शिव पर आधारित इस प्राचीन मंदिर का रहस्य लोगो को मालूम तब चला जब मुंगेली के तत्कालीन तहसीलदार राम विजय शर्मा ने इसकी खोज की और उन्होंने बताया कि की यह भारत का नही अपितु विश्व का एक मात्र ऐसा मंदिर है जिसके गर्भ गृह में मिथुन मूर्तियों का चित्रण है..इतिहास में डॉक्टरेट व पुरातत्व से जुड़े राम विजय शर्मा जब 2016 में मुंगेली तहसीलदार थे तब वो इस क्षेत्र के जनपद सदस्य शिवकुमार बंजारा के निवास स्थान से भोजन उपरांत जब इस मंदिर के दर्शन करने पहुचकर बाहर से ही जा रहे थे तब उन्हें अंदर गर्भ गृह में दर्शन करने की जिद पर जब वो अंदर गए और वहां का नजारा देखा तब उन्होंने ऐसे अद्भुत नजारे देखकर दंग हो गए क्योंकि वह पुरातत्व से जुड़े और इतिहास में पीएचडी करने वाले थे तो उन्होंने तुरंत बताया कि ऐसा मंदिर भारत ही नही विश्व का अनोखा मंदिर है जिसके गर्भ गृह में मिथुन मूर्तियों का चित्रण है और इस पर उन्होंने विचार करते हुए बताया कि उस दौरान जब मंदिर का निर्माण किया जा रहा था तो निर्माण करने वाले शासक इन मूर्तियों का चित्रण इस आशय से किये होंगे कि उस समय लोग अपने घर परिवार पत्नी बच्चो को त्याग कर चले जाते थे तब राजा ने सोचा होगा ऐसे में राज्य को कैसे खत्म होने से बचाया जाए तब इस तरह मंदिर के गर्भ गृह में मिथुन मूर्तियों का हस्तशिल्प किया गया होगा और सोच होगी कि लोग मंदिर में पूजा करने आते होंगे तब इस मिथुन मूर्तियों का चित्रण को देखकर आकर्षित होते हुए उनके मन मे अपनी पत्नी का ख्याल आता होगा जिससे वह लोग अपनी पत्नियों को त्यागकर जाने की सोच दूर होगी...इस मंदिर के विषय मे जब तत्कालीन तहसीलदार द्वारा पुरातत्व के अधिकारियों को जानकारी दी गई तब वह इस मंदिर में आए और बताया कि वाकई में अद्भुत और एकमात्र मंदिर है...तत्कालीन तहसीलदार बताते है कि इस मंदिर में मिथुन चित्रण के विषय मे बताया गया कि पत्नियों के जीवन मे कितना बड़ा योगदान होता है इसके लिए ही ध्यान में रखते हुए मंदिर पर 3 दिवसीय "पत्नी पूजा" मेला लगाने का प्रस्ताव प्रशासन को दिया गया है जिससे यह पूजा पूरे भारत सहित विश्व मे जाना जाएगा...वही इस मंदिर से आस्था रखने वाले लोग मानते है कि जो मनोकामना लेकर वह आते है वो भगवान शिव पूरा करते है इस क्षेत्र के जनपद सदस्य शिवकुमार बंजारे 1999 से जनपद सदस्य है जो बताते है कि वह इस मंदिर से सालो से आ रहे है और जब भी चुनाव में नामांकन डालने जाते है वह यही से भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर चुनाव लड़े और सफलता भी मिली है वही उन्होंने मांग की है कि इसे संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग और प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है...मुंगेली कलेक्टर राहुल देव जब इस मंदिर के दर्शन करने पहुचे तब अद्भुत दृश्य देखकर उन्होंने इसकी खोज करने वाले तत्कालीन तहसीलदार राम विजय शर्मा को सम्मानित किया साथ ही उन्होंने बताया कि इस मंदिर के ख्याति के लिए बेहद ही ज्यादा प्रचार प्रसार की जरूरत है वही प्रशासन जनसहयोग के माध्यम से इस धरोहर को संरक्षित करने के लिए हर सम्भव प्रयास करेगी...
भले ही यह मंदिर विश्व का एकमात्र मंदिर है और मुंगेली जिले की दुर्लभ धरोहरों में से एक है।लेकिन इसपर अब तक पुरातत्व विभाग एवं जिम्मेदारों ने सुध नही ली है...जिसकी वजह से इस मंदिर को जितना ख्याति प्राप्त करना चाहिए वो जिम्मेदारों की लापरवाही से नही हो पाया है...वही अगर पुरातत्व विभाग इसपर संज्ञान लेकर इसपर ध्यान दे तो कई रहस्य जो दबे हुए है उसपर से पर्दे उठेंगे..वही मुंगेली की पहचान अचानकमार,खुड़िया,मदकू से होती रही है लेकिन जल्द ही इस कड़ी में यह मंदिर का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखे जाएंगे..!